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सेहरी-इफ्तारी की सूचना देने किले की पहाड़ी पर चलती है तोप

3 वर्ष पहले
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रायसेन| रोजा शुरू करने और खोलने की सूचना देने रायसेन किले की पहाड़ी पर सुबह-शाम तोप चलाई जाती है। तोप चलाने की यह परंपरा नवाबी शासन काल से चली आ रही है। रमजान माह में तोप चलाने जिला प्रशासन द्वारा बाकायदा एक माह के लिए लाइसेंस दिया जाता है। तीन पीढ़ी से तोप चलाने वाले परिवार के शखावत उल्लाह उर्फ पप्पू भाई ने बताया कि पहले उनके दादा फिर उनके पिता यह काम कर रहे थे। पिता के बाद वह 15 साल से तोप चला रहे हैं।

300 ग्राम बारूद से रोजाना होता है धमाका

तोप चलाने के लिए उसमें एक बार में 300 ग्राम बारूद की आवश्यकता पड़ती है। सेहरी और इफ्तारी के समय पर तोप चलाने के लिए 20 मिनट पहले से तैयारी करना पड़ती है। तोप चलाने में समय का पूरा ख्याल रखा जाता था, ताकि निर्धारित टाइम पर तोप चल सके।

फोटो-देव शाक्या, कंटेंट-विष्णु यादव

15 किमी तक सुनाई देती है तोप की आवाज

150 फीट की ऊंचाई पर स्थित किले की पहाड़ी पर तोप रखी हुई है। यहां से चलने वाली तोप की आवाज 15 से 20 किमी दूर तक सुनाई देती है। इस तोप की आवाज सुनकर ही रोजेदार अपने रोजे खोलते और शुरू करते हैं। इतना ही नहीं सुबह के समय लोगों को जगाने के लिए नगाड़े भी बजाए जाते हैं। इनकी आवाज भी शहर में सुनाई देती है।

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