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घरों से निकलने वाला सीवेज का पानी प्लांट में करेंगे साफ फिर डालेंगे मिश्र तालाब में

3 वर्ष पहले
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शहर में ट्रिकलिंग पद्धति का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो चुका है।

750 घरों में कनेक्शन किए, प्लांट तक ले जाया जाएगा सीवेज का पानी

भास्कर संवाददाता| रायसेन

प्रदेश का दूसरा और जिले का पहला ट्रिकलिंग पद्धति वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया है। अब इससे शहर के साढ़े सात सौ घरों से निकलने वाले सीवेज के पानी को ट्रीट किया जाएगा।

पानी साफ होने के बाद ही उसे मिश्र तालाब में मिलाया जाएगा। इससे तालाब का पानी साफ रहने लगेगा। अभी तक सीवेज का पानी बिना ट्रीट किए ही तालाब में मिला दिया जाता था। अब इसके लिए शहर के दो वार्डों से पाइप लाइन के माध्यम से लाया गया सीवेज पहले ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट किया जाएगा। इसके लिए डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है। इस प्लांट की टेस्टिंग भी की जा चुकी है। अब बिजली के लिए डीपी लग जाने के बाद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट काम करना शुरू कर देगा। इससे शहर के साढ़े सात सौ घरों से निकलने वाले सीवेज का पानी यहां साफ किया जाने लगेगा। यूरोपियन यूनियन प्रोजेक्ट के तहत शहर में यह काम किया गया है। खास बात यह है कि ट्रिकलिंग पद्धति वाला ट्रीट प्लांट पूरे मध्यप्रदेश में बुरहानपुर के बाद रायसेन में लगाए जाने का दावा किया जा रहा है।

प्रदेश में ट्रिकलिंग पद्धति वाला ट्रीट प्लांट बुरहानपुर के बाद रायसेन में लगाने का दावा

यह है स्थिति

04 करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया गया प्रोजेक्ट

08 किमी लंबाई में डाली गई अंडर ग्राउंड सीवेज लाइन

01 एमएलडी क्षमता का लगाया गया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

01 डीपी बिजली के लिए लगाई जाना है

02 वार्डों में डाली गई है अंडर ग्राउंड सीवेज लाइन

ट्रीटमेंटप्लांट की टेस्टिंग शुरू, की जा रही बिजली की व्यवस्था

चार करोड़ रुपए की लागत का है प्रोजेक्ट

अंडर ग्राउंड सीवेज लाइन और ट्रीटमेंट प्लांट वाला प्रोजेक्ट चार करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया गया है। इसके लिए दो वार्डों के आधा दर्जन से अधिक मोहल्लों की सड़कों और गलियों में खुदाई कर वहां पाइप लाइन डाली गई और जगह-जगह इस लाइन पर चैंबर बनाया गए हैं। करीब डेढ़ करोड़ रुपए की राशि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट आैर शेष राशि पाइप लाइन पर खर्च की गई है।

डीपी के लिए चल रही कवायद

ट्रीटमेंट प्लांट में लगी आधा दर्जन मोटरों को चलाने के लिए वहां अभी बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसके लिए नगरपालिका द्वारा वहां एक डीपी लगवाने की प्रक्रिया चल रही है। डीपी लग जाने के बाद प्लांट काे आवश्यक बिजली मिल पाएगी और सीवेज की पानी की सफाई का काम शुरू हो जाएगा।

दो वार्डों में आठ किमी लंबी डाली गई लाइन

शहर के वार्ड 11 और 12 के आधा दर्जन मोहल्लों में सीवेज की अंडर ग्राउंड पाइप लाइन डाल दी गई है। इन वार्डों में आठ किमी लंबाई वाली लाइन डाली गई है। इस लाइन से शहर के 750 घरों में सीवेज कनेक्शन भी दिए जा चुके हैं। इतने घरों का सीवेज पाइप लाइन के माध्यम से मिश्र तालाब के पास लगाए गए ट्रीटमेंट प्लांट के पास ले जाया जाएगा।

ऐसे काम करता है ट्रिकलिंग सीवेेज प्लांट

यूरोपियन यूनियन प्रोेजेक्ट पर काम कर रहे नगरपालिका के सुमित क्षेत्रिय ने बताया कि ट्रिकलिंग पद्धति का ट्रीटमेंट प्लांट चार स्टेप में काम करता है। सबसे पहले पाइप लाइन से सीवेज का पानी चैंबर में लाया जाएगा। यहां लगी जालियों से पन्नियां और प्लास्टिक छनकर अलग हो जाएगा। इसके बाद पानी को आगे इमोफ टैंक में ले जाया जाएगा। इसमें भारी अशुद्धियां नीचे जम जाती हैं और तीसरे स्टेप में यह पानी एक बड़े टैंक में भेजा जाता है। यह पानी मोटर के माध्यम से करीब 10 फीट की ऊंचाई पर ले जाया जाता है, जहां लगे छेद वाले पाइपों से इसे केमिकल ट्रीट किए हुए चार लेयर में लगे मीडिया के ऊपर गिराया जाता है। यहां से छनकर पानी टैंक के नीचे के हिस्से में जमा हो जाता है। चौथी स्टेप में इसे अगले टैंक में डाला जाता है। इसके बाद पानी साफ हो जाता है।

शहर के वार्ड 11 और 12 में अंडर ग्राउंड पाइप लाइन डाल दी गई है। इस पाइप लाइन से सीवेज का पानी मिश्र तालाब के पास बनाए गए ट्रिकलिंग पद्धति के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाया जाएगा। इस प्लांट से पानी साफ किया जाएगा। जमना सेन, अध्यक्ष, नगरपालिका रायसेन

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