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तीन बेटियों के बाद बेटा हुआ तो नर्सों ने मांगे 1000 रु. नहीं देने पर देखरेख में लापरवाही, शिशु की मौत

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| रायसेन/उदयपुरा

नोनिया बरेली,उदयपुरा में रहने वाली शमशुन बी और उनके पति ईशुव खां बहुत खुश थे कि उनके यहां तीन बेटियों के बाद एक बेटे ने जन्म लिया है, लेकिन डिलेवरी के समय उनसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दाइयों और नर्सों ने एक हजार रुपए की मांग की। इस पर ईशुव ने उन्हें दो सौ रुपए भी दिए। इसके चलते स्वास्थ्य अमले ने उनके बच्चे की उचित देखरेख नहीं की। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर और स्टॉफ की लापरवाही से बच्चे की जान चली गई। गुस्साए परिजनों ने पहले तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हंगामा किया। इसके बाद डॉक्टर गिरीश वर्मा पर मामला दर्ज कराने के लिए थाने और बीएमओ केके सिलावट को आवेदन दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच में लिया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रति माह औसतन 50 डिलेवरी कराई जाती हैं।

कानूनी कार्रवाई की मांग : ईशुव खां ने थाना प्रभारी को आवेदन देकर मांग की है कि मामले को संज्ञान में लेकर उस समय ड्यूटी पर तैनात दाई,नर्स व डाक्टर वर्मा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

उदयपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हर महीने होती हैं 50 से अधिक डिलेवरी
जिम्मेदार डॉक्टर बोले- ऊपर का दूध पिलाने से हुई मौत
डॉ. गिरीश वर्मा ने बताया कि डिलेवरी के बाद शमशुन बी का बच्चा दूध नहीं पी रहा था। उन्हें कहा गया था कि मां का दूध पिलाने के लिए बार-बार प्रयास करें। उन्होंने ऐसा न कर ऊपर का दूध नवजात को पिला दिया। यह दूध बच्चे के फेंफड़ों में जम गया। इससे उसकी मौत हो गई।

दाई और नर्सों ने कहा था- भिखमंगे हो क्या, पूरे 1000 रुपए दो
11 अप्रैल को शाम 7 बजे मैंने प|ी शमशुन को भर्ती कराया। रात लगभग सवा ग्यारह बजे शमशुन बी ने पुत्र काे जन्म दिया। बच्चा पूर्ण स्वस्थ था। जन्म के बाद ड्यूटी पर मौजूद दाई/ नर्स ने जिनका कि मैं नाम नहीं जानता, मुझसे एवं मेरे घरवालों से रुपए मांगे। गरीब होने के कारण हमने कारण खुशी में 50-50 रुपए करके 200 रुपए उन लोगों को दिए। उस समय वहां कोई डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। दाई एवं नर्सों ने रुपए हमारे मुंह पर फेंक दिए और कहा कि भिखमंगे हो क्या, पूरे एक हजार रुपए दो, पैसे नहीं दोगे तो हमारी कोई जवाबदारी नहीं होगी। हम तुम्हें रायसेन भिजवा देंगे और रायसेन के कागज बनवा दिए। हमने हाथ पैर जोड़े, हमसे माफी भी मंंगवाई गई और हमारी अम्मा से कहा कि जो मैला डिलेवरी के दौरान निकलता है उसे अपने हाथों से फेंककर आओ। इस बात पर हमने नाराजगी जताई। इसके बाद फिर किसी नर्स और डॉक्टर ने जच्चा-बच्चा की कोई देखरेख नहीं की। 12 अप्रैल को दोपहर में बच्चे को बुखार आ गया। एक बार एक नर्स ने दवाई दी और फिर उसके बाद कोई देखने नहीं आया। रात ढाई बजे बच्चा हिचकियां लेने लगा तो फिर डॉक्टर वर्मा के पास गए। उन्होंनें कहा कि मैं आ रहा हूं, लेकिन 3 बजे तक कोई नहीं आया और न कोई इलाज किया। जब बच्चे की मृत्यु हो गई, तब एक नर्स ने डॉक्टर को फोन किया फिर डॉक्टर वर्मा आए और बच्चे का पेट दबाया जिसमेंं बच्चे के मुंह और नाक से दूध निकला, बेटे की मौत हो चुकी थी। हम गरीब लोगों के लिए शासन ने सारी सुविधाएं करवाई हैं, लेकिन अस्पताल उदयपुरा में डॉक्टर एवं नर्स-दाइयों की दादागिरी चल रही है। रुपए नहीं देने पर गरीबों की जान के साथ खिलवाड़ की जाती है।

-पिता ईशुव खां ने जैसा कि थाना प्रभारी को बताया

उदयपुरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद पीड़ित परिवार।

भास्कर तत्काल
एक डॉक्टर पदस्थ, शेष अटैच
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुरा में डाॅक्टरों के सात पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद वहां एक मात्र डॉ. विजय लक्ष्मी वर्मा ही पदस्थ हैं। इनके अलावा देवरी के मेडिकल ऑफिसर डॉ. केके सिलावट को उदयपुरा बीएमओ का प्रभार दिया हुआ है। डॉ. राहुल रघुवंशी और डॉ. गिरीश वर्मा यहां अटैच हैं। इसी तरह से नर्सों के भी दस पद स्वीकृत हैं लेकिन पांच ही स्टॉफ नर्स पदस्थ हैं। यहां सीजर करने की व्यवस्था नहीं है और न ही मरीजों को खून चढ़ाया जा सकता।

ईशुव खां ने थाने में शिकायती आवेदन देकर नवजात की मौत के मामले में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को दोषी ठहराया है। इसके चलते मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। मनोज दुबे थाना प्रभारी, उदयपुरा

परिजनों ने नवजात की मौत के मामले में जांच के लिए आवेदन दिया है। जांच के बाद जो स्थिति सामने आएगी, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। केके सिलावट, बीएमओ उदयपुरा

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