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खेत में बोया था चना, गिरदावरी में लिखा गेहूं, अब केंद्र पर नहीं ले रहे उपज

3 वर्ष पहले
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सरकारी खरीदी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। हालत ये है कि पंजीयन में बरती गई लापरवाही के कारण अब किसान परेशान हो रहे हैं।

वे कभी कलेक्टोरेट तो कभी मंडी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। भादनेर गांव में रहने वाले 85 वर्षीय किसान भीखमसिंह तपती दोपहरी में जिला मुख्यालय पर यहां से वहां भटक रहे थे। मंडी कार्यालय पहुंचकर उन्होंने बताया कि उन्होंने गेहूं की फसल बोई ही नहीं है। इसके बावजूद पंजीयन में गेहूं लिख दिया। अब वे सरकारी केंद्रों पर अपना चना नहीं बेच पा रहे हैं। भीखमसिंह ने अपनी 5 एकड़ रकबे में चने की फसल बोई थी।

इस जमीन से उसे करीब 28 क्विंटल चने की उपज मिली। लेकिन जब वह सरकारी केंद्र पर अपने पंजीयन की कागज लेकर पहुुुंचा तो पता चला की उसके नाम से चने की जगह गेहूं का पंजीयन कर दिया गया है। अब यह किसान जिम्मेदार पटवारी अथवा सहकारी संस्थाओं की लापरवाही के चलते चना बेचने से वंचित रह सकता है। इससे उसे हजारों रुपए का नुकसान होने की संभावना बन गई है। वहीं पैमद निवासी दूसरे किसान कमलेश चौधरी ने बताया कि उन्हें चने की बिक्री के लिए 18 अप्रैल को ही एसएमएस मिल गया था। लेकिन उस समय उनकी फसल तैयार ही नहीं हुईं थी। अब जब फसल तैयार हाे गई है तो उसे बेचने में परेशानी आ रही है।

मंडी के बाहर लगी एक किलोमीटर लंबी लाइन

कृषि मंडी में गेट पर जब से टोकन दिए जाने लगे हैं, तब से मंडी के बाहर ट्रालियों की लंबी लाइन लगने लगी। गुरुवार को कृषि उपज मंडी गेट से लेकर दशहरा मैदान तक करीब एक किलोमीटर लंबी ट्रालियों की लाइन लगी हुई थी। इससे किसानों को अपने नंबर का घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा था।

परिवहन की धीमी रफ्तार

सरकारी केंद्रों पर खरीदे जा रहे चने के परिवहन की रफ्तार बहुत धीमी चल रही है। इसके चलते स्थानीय कृषि उपज मंडी में बड़ी मात्रा में चना जमा हो गया है। स्थिति ये है कि टीन शेड की जगह तो भर ही गईं है वहीं मंडी परिसर में भी जगह-जगह बोरियों के ढेर लगे हुए हैं।

चने की आवक बड़े पैमाने पर हो रही है। इसके चलते खरीदी केंद्रों पर चना जमा हो गया है। अभी तक 39 हजार 925 मीट्रिक टन चना खरीदी जा चुका है। वहीं 30 हजार 199 मिट्रिक टन का परिवहन किया गया है। प्रदीप गहरवाल,डीएमओ रायसेन

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