भास्कर न्यूज| राजधनवार/खोरीमहुआ
धनवार थाना क्षेत्र के करगाली खुर्द गांव में संचालित अवैध माइंस हादसे में घायल दो मजदूरों में से एक की मौत हो गई है। मृतक कोडरमा जिले के ढाब गांव का निवासी बताया जाता है। हालांकि धनवार पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही है। पुलिस का कहना है कि घायल होने की खबर है। लेकिन यदि कोई मरा है और उसका परिजन थाना आता है तो संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। हालांकि जिला खनन पदाधिकारी ने सिर्फ परमिट पर बगैर एनओसी के खदान संचालन करने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ धनवार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराया है। जिसमें कोडरमा जिले के मरकच्चो थाना अंतर्गत नवलशाही निवासी बासुदेव मोदी पिता स्व रूपण मोदी और धनवार थाना क्षेत्र के करगाली खुर्द निवासी मथुरा प्रसाद वर्णवाल को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। डीएमओ ने बताया है कि करगाली खुर्द के प्लॉट संख्या 29 व 57 में 1.60 एकड़ में खनन पट्टा पारित है। लेकिन पर्यावरणीय सहमति प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से सीटीई/सीटीओ फेल हो चुका था अौर परिवहन चालान भी निर्गत नहीं था। बावजूद अवैध तरीके से पत्थर उत्खनन का कार्य किया जा रहा था। इसे लेकर झारखंड लघु खनिज समानुदान नियमावली 2004 के नियम 54 एवं संविद भाग 7 का का उल्लंघन का आरोपी ठहराते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इधर धंसे पत्थर खदान से सभी कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने को लेकर रविवार को अहले सुबह बोकारो व रांची से पहुंची रेस्क्यू टीम बुलाई गई थी। जिन्होंने पूरे खदान का जायजा लिया। लेकिन कहीं भी कोई दबा मजदूर नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक इस हादसे में दो कर्मी घायल हुए थे। थाना प्रभारी के मुताबिक दोनों घायलों का रांची में इलाज चल रहा है।
रांची से पहुंची एनडीआरएफ की 35 सदस्यीय टीम ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
डीएमओ ने कहा- जारी किया था नोटिस : जिला खनन पदाधिकारी विभूति कुमार ने बताया कि बासुदेव मोदी के नाम से सन 2010 से 2020 तक खनन का पट्टा प्राप्त है। पूर्व में सीटीओ तथा पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त थी, जबकि वर्तमान में यह फेल हो गई है। परिवहन चालान भी उसके पास मौजूद नहीं है। जब संज्ञान में आया तो उन्होंने मार्च में नोटिस किया था, जिसमें उन्होंने खदान बंद होने की बात कही थी। लेकिन चोरी-छिपे चालू रखा। चाल धंसने के मामले में अवैध रूप से संचालन करने वाले बासुदेव मोदी और मथुरा बर्णवाल के खिलाफ धनवार थाना में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
खदान में राहत व बचाव की तैयारी में खड़ी रेस्क्यू टीम और खदान धंसने के कारण जमा मलबा।
टीम ने खदान के नीचे जाने की नहीं की हिम्मत : घटना के दूसरे दिन रविवार सुबह को करगाली खुर्द खदान के समीप बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों की भीड़ जुट गई। मजदूरों के दबे होने की आशंका के मद्देनजर रांची से रेस्क्यू ऑपरेशन की 35 सदस्यीय एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई थी। जिनके साथ गिरिडीह जिला खनन पदाधिकारी विभूति कुमार, सीओ शशिकांत शिंकर, थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार सिंह दलबल के साथ सुबह से शाम तक घटनास्थल पर डटे रहे। इसी बीच रेस्क्यू की टीम खदान के नीचे उतरी और राहत कार्य चलाया। लेकिन अधिक नीचे जाना रेस्क्यू टीम को भी खतरा महसूस हुआ और कुछ देर बाद ऑपरेशन को बंद कर दिया गया। इस बीच कोई परिजन शिकायत लेकिन नहीं पहुंचे कि उनका कोई आदमी माइंस में दबा पड़ा है। इस लिहाज से घटनास्थल पर मौजूद रेस्क्यू टीम व अधिकारियों ने किसी मजदूर के दबे होने की बात से इनकार कर दिया।
मिट्टी व धूल के कारण खदान में छाया अंधेरा
इधर खदान में काम कर रहे कपिलदेव शर्मा ने बताया कि खदान में कुल 14 मजदूर काम कर रहे थे। शनिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे जब चाल खिसकने लगा तो अफरातफरी मच गई। जिसमें डोमचांच थाना क्षेत्र के महेंद्र यादव तथा जैनुल अंसारी जख्मी हो गया। मौके पर ड्रिल कर रहा ट्रैक्टर चालू हालत में ही मलबे में दब गया। चाल इतनी जबर्दस्त तरीके से धंसी थी कि मिट्टी के धूल से बहुत देर तक खदान में अंधेरा छा गया। जब इसकी सूचना खदान के ऊपर लोगों को मिली तो सर्वप्रथम रस्सा के सहारे घायलों को बाहर निकाला और इलाज के लिए तिलैया ले जाया गया। बाद में पहुंचे सीओ तथा धनवार पुलिस की मदद से शनिवार देर रात में निकाला। इनमें मजदूर गोपी किशन मोदी, संतोष सिंह, रामचंद्र रजक, पुनीत सिंह, रामरतन सिंह, वीरेंद्र रजक, कपिलदेव शर्मा, भोला यादव, महेश सिंह, भोला सिंह शामिल है। सभी को सुरक्षित धनवार थाना ले जाया गया, जहां से रविवार को घर भेज दिया गया।
एनडीआरएफ ने की खदान की छानबीन
एनडीआरएफ की टीम के इंस्पेक्टर पीटर पोल डुग डुगी ने बताया कि जिला प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि धंसे खदान में अब कोई मजदूर नहीं दबा है। इस कारण वहां उनकी टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन बंद कर दिया। पूरे खदान की छानबीन कर ली गई है।