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प्याज 30 पैसे किलो में हुए नीलाम, किसान बिना बेचे ही वापस लौट गए

3 वर्ष पहले
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लहसुन के बाद अब प्याज भी किसानों को रुलाने में कोई कसर नही छोड़ रहा है। लहसुन के भाव अत्यंत कम होने पर किसानों को लागत भी नहीं निकली थी। इसके बाद प्याज की भी यही स्थिति है। ओने पोने दामों पर प्याज सब्जी मंडी में किसान बेचने पर मजबूर है। भावांतर योजना में खरीदी प्रारंभ होने के दूसरे दिन ही किसानों को यहां प्याज का अब तक का सबसे कम मूल्य मिला। यहां प्याज मात्र 30 पैसे प्रति किलो तक बिका। इतने कम भाव पर पहले कभी प्याज सब्जी मंडी में नहीं बिका था।

सरकार की भावांतर योजना में पंजीयन कराने के बाद एवं सरकार द्वारा किसानों का प्याज नहीं खरीदते हुए व्यापारियों द्वारा ही प्याज खरीदी की जा रही हैं। गत वर्ष सरकार को प्याज की खरीदी में करोड़ों रु. का नुकसान उठाना पड़ा था। इसलिए इस बार सरकार द्वारा भावांतर योजना लागू कर बिकने वाले भाव का औसत भाव निकालकर अंतर की राशि किसानों को देने का फैसला किया गया। जिसके बाद यहां खरीदी प्रारंभ होने से ही प्याज की आवक भी कम हो रही है और भाव भी न्यूनतम मिल रहे है।

इससे किसानों में मायूसी छाई हुई है। मंडी में प्याज लेकर आए किसान रामेश्वर ने बताया इस बार किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। पहले लहसुन में एवं अब प्याज में भाव कम मिलने से लागत भी नहीं निकल रही है। आज जो भाव प्याज बिका वह शायद पहले कभी नहीं बिका होगा। कृषि उपज मंडी में लग रही सब्जी मंडी में मंडी कर्मचारियों की उपस्थिती में ही प्याज की नीलामी का कार्य चल रहा है।

प्याज की बोली बहुत कम पैसे बढ़ाकर व्यापारियों द्वारा लगाई जा रही है। ज्ञात हो कि हाल ही में मंडी में काम कर रहे सब्जी दलालों को ही मंडी द्वारा सब्जी मंडी में व्यापारियों के रुप में रजिस्टर्ड किया है। जानकारी के अनुसार करीब 15 व्यापारियों ने लाइसेंस लिए है।

इनमें से आधी संख्या में ही व्यापारी प्याज की नीलामी में भाग ले रहे है। जिससे किसानों को प्याज के कम दाम मिल रहे हैं।

अधिकतम 7 रु. व न्यूनतम 30 पैसे किलो मिल रहे

मंडी में करीब 2500 क्विंटल प्याज की आवक हुई लेकिन भाव न्यूनतम जहां 30 पैसे प्रति किलो रहे वहीं अधिकतम भाव 700 रु. क्विंटल अर्थात 7 रु. किलो रहे। किसानों द्वारा प्याज का पंजीयन कराने के बाद भी अब तक उन्हे यह नहीं पता है कि कितनी राशि सरकार द्वारा उनके खातों में डाली जाएगी। इसके चलते दो किसान जिनके प्याज का भाव बहुत कम लगाया था, वे बगैर बेचे ही मंडी से प्याज लेकर चले गए।

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