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ऋषभचंद्रजी सहित मुनि मंडल का अालीराजपुर में मंगल प्रवेश

3 वर्ष पहले
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राजगढ़. आचार्य का आलीराजपुर में मंगल प्रवेश हुआ।

भास्कर संवाददाता | राजगढ़

आचार्यश्री ऋषभचंदसूरीश्वरजी, मुनि रजतचंद्रविजय, मुनि पुष्पेंद्रविजय, मुनि निलेशचंद्रविजय, मुनि प्रितीयशचंद्रविजय, मुनि रुपेंद्रविजय एवं मुनि जिनचंद्रविजय आदि जैन मुनि मंडल का आलीराजपुर में रविवार को मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य एवं मुनि मंडल ने सुबह 7.30 बजे प्रवेश किया। जैन श्रीसंघ की ओर से कलश सामैया के साथ आचार्य की अगवानी की। 9 बजे शीतल कलेक्शन से नगर प्रवेश यात्रा शुरू हुई। आचार्य ने धर्मसभा भी की।

यात्रा झंडा चौक पोस्ट आॅफिस चौराहा, एमजी रोड होते हुए जैन मंदिर पहुंची। जगह-जगह गहुली कर आचार्य की अगवानी समाजजन ने की। स्थानीय राजेंद्र उपाश्रय में आचार्य ऋषभचंद्रसूरीश्वर ने जैन समाजजनों से प्रवचन के दौरान कहा मन को बंधन से मुक्ति की और ले जाने के लिए इतना व्यस्त कर दो की वह परदोष नहीं देख सके। यदि परदोष देखने में मन लगे तो पहले स्वदोष देखों। भाव से उन कार्यों से दूर हो जाओ तो बुराई की और ले जाते है। हम अपने आप में लीन हो जाए यही मन की समाधि है। संसार में दो तरह के लोग होते है एक डरते है और दुसरे डराते है। जीवन में कर्म, पाप, दुष्कर्म और लोकनिंदा से डरो और डराना है तो अपने आप को डराओ कि आने वाले जीवन में कैसा कर्मफल प्राप्त होगा। आज रुपया होते हुए भी आदमी दुखी दिखता है तो कहता है कि उसने क्या पाप किया होगा। पाप दिखता नहीं है पाप से डरे। महिलाएं समय की उपयोगिता भलीभांति जानती है और हर काम समय पर करती है। जैन समाजजन मौजूद थे। आचार्य ने जैन संगीतकार देवेश जैन को वर्शीतप आराधना उचराने की विधि करवाई।

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