पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • नेफेड से अधिकृत व्यक्ति देरी से पहुंचा, तीन दिन बाद शुरू हुई चने की खरीदी

नेफेड से अधिकृत व्यक्ति देरी से पहुंचा, तीन दिन बाद शुरू हुई चने की खरीदी

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भावांतर योजना में चने की खरीदी 10 अप्रैल से शुरू होना थी लेकिन यह तीन दिन बाद शुक्रवार को शुरू हुई। बताया जा रहा है कि भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) से अधिकृत व्यक्ति गुरुवार को पहुंचा। उसके द्वारा एफएक्यू क्वालिटी देखने के बाद ही चने की खरीदी होना थी। हालांकि किसानों को समिति में मैसेज भी 10 तारीख से ही कर दिए थे। जो किसान चने लेकर पहुंचे उसकी खरीदी नहीं हो सकी। इस बीच किसान मंडी स्थित खरीदी केंद्र सिद्धि विनायक सोसायटी के चक्कर काटते रहे लेकिन संतुष्टिपूर्वक जवाब नहीं मिला। परेशान किसान उपज बेचे बिना लौट गए। गुरुवार को आए किसान रात भर मंडी में ही रुके। जो कि 30 से 40 किमी दूर से आए थे। वापस जाने में उन्हें दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता। सरदारपुर तहसील में करीब 6 हजार किसानों ने चने बेचने के लिए पंजीयन कराया है।

शुक्रवार को कृषि उपज मंडी परिसर में 12 बजे गहमागहमी रही। यहां कई किसान ट्रैक्टर ट्राॅलियों में चने लेकर आए थे। सभी पंजीयनकर्ता थे। करीब 10 ट्रॉलियां एवं अन्य वाहन खड़े थे। सिद्धि विनायक सोसायटी के भुवानसिंह कुशवाह ने बताया खरीदी के संबंध में बताया था कि नेफेड द्वारा एक व्यक्ति की नियुक्ति की है। उनके द्वारा क्वालिटी देखकर ही खरीदी की जाएगी। नेफेड से अधिकृत व्यक्ति ही यहां गुरुवार को पहुंचा। जिसके कारण पहले तीन दिन खरीदी नहीं हो सकी। नेफेड से अधिकृत अनिरुद्ध राठौड़ मेघनगर ने बताया गुरुवार को ही यहां आया। चने की एफएक्यू क्वालिटी देखकर खरीदी की जाएगी। तहसीलदार से मोबाइल पर संपर्क किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

राजगढ़. मंडी स्थित सिद्धि विनायक सोसायटी पर बड़ी संख्या में किसान चने की उपज लेकर आए थे।

दोपहर बाद हुई खरीदी शुरू, तीन दिन से किसान हो रहे थे परेशान
दसई के नानालाल पाटीदार ने बताया 10 अप्रैल को भावांतर योजना में चने की उपज बेचने के लिए मैसेज मिला। ट्राॅली भरकर राजगढ़ आए लेकिन यहां कोई भी संतुष्टिपूर्वक जवाब देने वाला नहीं था। समिति से कहा अभी खरीदी प्रारंभ नहीं की गई है। तहसीलदार को भी फोन लगाया वे यहां आए भी और कह गए कि खरीदी चालू करो लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसलिए आज दुबारा आना पड़ा। दो बार आने पर समय का एवं आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। गुरुवार को भी दिनेश शोभाराम राजोद, रुगनाथ मारू लाबरिया, राधेश्याम नरहरि बोला, शकुंतला रमेशचंद्र, फतेसिंह निवासी घटोदा, हीरालाल बाबूजी निवासी रतनपुरा सहित अन्य किसान पहुंचे थे इन्हें भी समिति द्वारा कहां गया कि खरीदी कल से प्रारंभ होगी। सभी ने रात मंडी में ही बिताई और शुक्रवार को भी गर्मी के दौर में दोपहर 1 बजे तक उनकी उपज की खरीदी समिति द्वारा नहीं की गई थी। दोपहर 1 बजे बाद खरीदी का शुभारंभ करते हुए केसरपुरा निवासी बंटी के चने के ढेर की खरीदी की। एक मात्र कांटे पर 50-50 किलो की कट्टी में खरीदी की। इस कांटे पर किसानों से 50.850 ग्राम वजन लिया। इसमें 750 ग्राम कट्टी का वजन बताया। किसानों के अनुसार कट्टी का वजन इतना नहीं होता है। खरीदी के समय मंडी कर्मचारी हरिशंकर जोशी, मांगीलाल बर्फा, लखन जोशी मौजूद थे।

खुले में पड़ा है हजारों क्विंटल गेहूं
समिति द्वारा गेहूं की भी खरीदी की जा रही है। अभी भी यहां परिवहन की धीमी गति के कारण हजारों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा है। रोजाना मौसम के बदलते रहने से कभी भी पानी गिर सकता है। ऐसे में लाखों रु. के गेहूं का नुकसान हो सकता है। पूर्व में भी गत वर्ष इसी समिति द्वारा 8 रु. किलो की दर से 2 लाख क्विंटल से अधिक 16 करोड़ रु. के प्याज की खरीदी की थी। जिसमें से करीब 1 लाख क्विंटल प्याज बारिश की भेंट चढ़ गया था। सरकार को करोड़ों रु. का नुकसान उठाना पड़ा था।

खबरें और भी हैं...