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एक ही फर्म के बिना तारीख व नाम के बिलों का भुगतान कर राशि हड़पी

3 वर्ष पहले
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जनपद पंचायत बाग में तत्कालीन सीईओ व लेखाधिकारी ने एक ही फर्म के फर्जी बिलों के माध्यम से की घपलेबाजी की शिकायत पर हाल ही में हुई जांच में सही माना है। राजगढ़ की एक फर्म से पंचायत में दी जाने वाली कम्प्यूटर टेबल, ए फॉर साइज के पेपर, टेबल-कुर्सी, कारपेट रोल के नाम पर एक लाख से अधिक की सामग्री खरीदने में किसी भी प्रकार की टेंडर प्रक्रिया को नहीं अपनाया। बाग विकासखंड की विभिन्न पंचायतों ने फर्नीचर एवं स्टेशनरी के नाम पर लाखों रु. के फर्जी बिल लगाए। करीब 70 लाख के बिल-बाउचर जनपद कार्यालय से गायब कर दिए गए ताकि अधिक घपलेबाजी उजागर न हो। संभाग आयुक्त द्वारा गठित जांच कमेटी ने जनपद कार्यालय में हुए घपले की जांच कर प्रतिवेदन इंदौर कमिश्नर को सौंपा है।

दरअसल मामला यह है कि जनपद में 1 वर्ष पूर्व एक ही फर्म के फर्जी बिलों के माध्यम से तत्कालीन जनपद सीईओ एस सेंगर व लेखा अधिकारी ने बाग ब्लाॅक की विभिन्न पंचायतों में सामग्री क्रय के नाम से अनियमितताएं की।

सूचना के अधिकार के तहत ब्रज जाजू को मिली जानकारी अनुसार बाग ब्लाॅक की विभिन्न पंचायतों में सामग्री क्रय किए जाने के नाम पर तत्कालीन सीईओ व लेखाधिकारी ने एक ही फर्म के बिना तारीख के व बिना नाम के बिलों का भुगतान कर राशि हड़प ली। जनपद पंचायत सरदारपुर के नाम से सामग्री क्रय के बिलों का भुगतान जनपद पंचायत बाग के सीईओ ने कर दिया। सामग्री का सप्लाय महावीर जनरल स्टोर्स राजगढ़ को दिया जाकर इस फर्म के बोगस बिलों पर भुगतान भी कर दिया। मामले में बाग के प्रतिनिधि मंडल ने संभाग आयुक्त संजय दुबे से जांच की मांग की थी। जिस पर जांच कमेटी बनाकर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा था। जांच के दौरान बाग ब्लॉक की विभिन्न पंचायतों के सरपंच सचिवों को भी बुलाया गया। दस्तावेज देखने के बाद प्रथम दृष्टियां ही घोटाले को फर्जी बिलों के माध्यम से किया जाना पाया। सप्लायर फर्म द्वारा जारी बिलों में एक ही सीरियल नंबर पर दो-दो बार सामग्री बिल बनाकर भुगतान प्राप्त किया।

सप्लायर फर्म द्वारा जनपद पंचायत बाग को कई बिल बिना तारीख व बिना नाम के दिए गए तथा इन सभी बिलों पर सीजीएसटी व एसजीएसटी जोड़कर राशि वसूल की गई। फर्म द्वारा जारी बिल 8.8.2017 क्रं. 446 व 448 है जबकि 9.8.2017 को बिल क्रं. 434, 435, 438, 439 है। जिसका भुगतान फर्जी हुआ। जांच दल में शामिल जिला कोषालय अधिकारी भगवती काग ने बताया जांच के दौरान दस्तावेजों को देखने पर प्रथम दृष्टिया ही फर्जीवाड़ा एवं घोटाला दिखाई दिया। जांच प्रतिवेदन संभाग आयुक्त को कार्रवाई के लिए भेज रहे हैं।

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