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22 साल बाद फिर जल संकट बोर सूखने से बिगड़ गए हालात

3 वर्ष पहले
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ब्यावरा शहर से तीन किमी दूर ग्राम पंचायत मोया में इस बार गिरे जल स्तर का खासा असर पड़ा है। 22 साल से गांव के हजारों लोगाें की प्यास बुझा रही एक मात्र ट्यूबवेल ने भी दम तोड़ दिया है। वहीं पिछले साल कराए गए बोर में भी पानी कम हो गया है। जो ग्रामीणों के लिए पर्याप्त नहीं है। गांव में एक भी हैंडपंप नहीं है। अचानक आए जल संकट से गांव की महिलाएं 22 साल पूर्व के जल संकट को याद कर दहशत में आने लगी हैं। क्योंकि उस दौर में महिलाओं को दो से तीन किमी दूर से पानी लाना पड़ता था, जो तत्कालीन सरपंच विक्रमसिंह जाटव ने ट्यूबवेल लगवाकर जल संकट से मुक्ति दिलाई थी।

2000 हजार की आबादी वाले मोया गांव जल संकट ने पैर पसार लिए हैं। एक बोर सूखने व दूसरे में पानी कम होने से ग्रामीण पानी के लिए भटक रहे हैं। पंचायत ट्यूबवेल का पानी इंटकवेल में एकत्रित गांव के तीन सार्वजनिक कुओं में बारी-बारी से पानी डालती है। लेकिन सैकड़ों परिवारों की पूर्ति नहीं कर पा रहा है। पानी डालते ही कुओं पर महिला, पुरुष सहित बालक-बालिकाएं बर्तन लेकर दौड़ पड़ते हैं। भारी भीड़ के बीच महिलाओं के साथ बालक-बालिकाएं भी बाल्टियां से पानी खींचने मशक्कत करते हैं। ऐसे में दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।

मोटरें निकालें तो मिले बराबर पानी: अधिकांश लोगों ने तीनों कुओं में एक हार्सपावर तक टिल्लू मोटरें डाल रखी हैं, जिससे कुएं का पानी घरों में पहुंच जाता है। पर्याप्त पानी होने तक तो ठीक था, लेकिन अब पानी संकट होने से यह मोटरें गांव में जल संकट का कारण भी बन रही हैं। क्योंकि कुओं में पानी डालते ही लोग मोटरों से पानी सींच लेते हैं। ऐसे में बगैर मोटर वाले लोगों को पानी मिल ही नहीं पाता है। ग्रामीणों को बराबर पानी उपलब्ध कराने ग्राम पंचायत को कुएंं से तमाम मोटरें निकलवा चाहिए। जिससे आवश्यकता अनुसार लोग कुए से पानी भरकर काम चला सकें।

22 साल पूर्व मोया में लड़कियां नहीं देते थे लोग : मोया में 22 साल पहले विकराल जल संकट था। इस समय पानी की समस्या को देखते हुए अन्य क्षेत्र के लोग मोया में अपनी लड़कियों की शादी नहीं करते थे। जो कर भी देते थे, उन्हें अपनी लड़कियों को दो-तीन किमी दूर से सिर पर पानी लाते देख दुखी होना पड़ता था। इसके बाद सरपंच विक्रमसिंह जाटव के कार्यकाल में एक बोर कराया था। जिसमें पर्याप्त पानी मिला। मोटर डालकर गांव तक पानी लाया गया। तब से अब तक गांव में पीने के पानी के साथ, मवेशियों सहित तमाम निर्माण और अन्य खर्च के लिए पानी मिला। लेकिन एक माह से यह बोर सूखने से जल संकट खड़ा हो गया है।

ट्यूबवेल चलते ही कुओं पर उमड़ती है महिला, पुरुष और बालक-बालिकाओं की भीड़

कुएं पर पानी भरने उमड़ी महिला व बालिकाओं की भीड़।

बोर सूखने से बनी समस्या

अपने पास दो बोर हैं। इसमें से 22 साल पुराना बोर सूखने से जल संकट है। दूसरा बोर में भी पानी कम है। सूखे बोर को रिबोर भी कराया गया, लेकिन उसमें पानी नहीं आया। लोगों की कुएं से मोटरें निकलवा रहे हैं। बारी बारी से कुएं में पानी डालकर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। -बद्रीलाल यादव, सरपंच, मोया

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