पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Bhilai
  • सवा घंटे तक तड़पता रहा घायल, कॉल पर भी नहीं पहुंचे डॉक्टर, उखड़ी सांसें

सवा घंटे तक तड़पता रहा घायल, कॉल पर भी नहीं पहुंचे डॉक्टर, उखड़ी सांसें

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
स्टाफ नर्सों की हड़ताल के बीच जिले के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शनिवार को अस्पताल के केजुअल्टी वार्ड में पहुंचा घायल सवा घंटे तक दर्द से तपड़ता रहा। लेकिन किसी डॉक्टर ने उसकी सुध नहीं ली। दोपहर पौने दो बजे डॉक्टर पहुंचे तब तक घायल की सांसें उखड़ चुकी थी।

जब भास्कर ने इस मामले को लेकर जिम्मेदारों से बातचीत कि तो वे दूसरे पर जवाबदेही का ठीकरा फोड़ते नजर आए। दरअसल शनिवार दोपहर तकरीबन 12 बजे से नेशनल हाइवे पर मूंदड़ा कुंज के सामने तेज रफ्तार से दौड़ रही दो बाइक आपस में भिड़ गई। इस हादसे में दो युवक और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां लेकिन यहां डॉक्टरों की मनमानी की वजह से घायलों को इलाज के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा। इन हालातों में एक की मौत हो गई। डॉक्टरों की पुष्टि के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

शॉक थैरेपी से पल्स नहीं ला पाए

घायल को अंतिम बार शॉक थैरेपी देते डॉक्टर।

ऐसे हुआ हादसा

शनिवार दोपहर 12 बजे ग्राम मचानपार (तुमड़ीबोड़) निवासी टोमन पिता देवनारायण सिंह पटेल (25), प|ी आरती पटेल (23) के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। तभी नेशनल हाइव पर मूंदड़ा कुंज के पास सामने से आ रहे ईश्वर पिता भगवती प्रसाद निवासी अमेठी (महासमुंद), हाल पता लखोली (राजनांदगांव) की बाइक से उनकी बाइक टकरा गई। इस हादसे में तीनों को गंभीर चोट आई। इलाज के लिए तीनों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया।

लेट पहुंचे डॉक्टर

केजुअल्टी वार्ड में घायलों का रखा गया था। आमतौर पर एक्सीडेंट्ल केसेस में सर्जरी विशेषज्ञ डॉक्टरों को इलाज के जाना पड़ता है। लेकिन लगातार कॉल करने के बाद भी डॉक्टर नहीं पहुंच रहे थे। परिजन के शोर मचाने पर दोपहर पौने दो बजे प्रबंधन ने मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. यूएस चंद्रवंशी को भेजा। डॉक्टर ने मरीजों का चेकअप किया। टोमन की हालत गंभीर थी। हार्ट बीट कमजोर पड़ चुकी थी। डॉक्टर ने शॉक थैरेपी देकर पल्स रेट लाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

इंचार्ज ने कहा- कॉल करते तो मैं खुद आ जाता

इस मामले में सबसे पहले जिम्मेदार व केजुअल्टी वार्ड इंचार्ज डॉ. प्रकाश खुंटे से भास्कर ने बात की। उनका कहना था कि घायल ईश्चर को उन्होंने देखा था, लेकिन टोमन संबंध में उन्हें जानकारी नहीं थी। उनके वहां से जाने के बाद टोमन को वहां लाया गया था। आम तौर पर ऐसे केसेस को सर्जरी विशेषज्ञ देखते हैं, हां यदि वे नहीं पहुंच रहे थे, तो कर्मचारियों को उन्हें कॉल करना था। वे तत्काल चेकअप के लिए पहुंचते। बता दें कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल 5 से 6 सर्जरी विशेषज्ञ हैं, लेकिन घायलों को देखने क्यों नहीं आए और जिम्मेदार गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

खून की उल्टियां देख छात्राओं के होश उड़े

हादसे में घायल ईश्वर को भी केजुअल्टी वार्ड में रखा गया था। ईश्वर के सिर में गंभीर चोट थी। इलाज के अभाव में ईश्वर बार-बार खून की उल्टी कर रहा था। यह देखकर नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं के होश उड़ चुके थे। अनुभव की कमी और डॉक्टरों की गैरहाजिरी में वे घायलों का उपचार नहीं कर पा रही थी। ईश्वर को रेफर किया गया।

मैं अभी मामले की जानकारी लेता हूं

पता चलने पर घालयों के चेकअप के लिए डॉक्टर को भेजा गया था। मौत की जानकारी मुझे नहीं मिली है। परिजन दो घंटे तक इंतजार करते रहे। ये तो गंभीर बात है, इस मामले की जानकारी लेता हूं। डॉ. प्रदीप बेक, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल

अस्पताल में अभी भी स्थिति बेकाबू

हड़ताल के दूसरे दिन भी अस्पताल की व्यवस्था सुधरी नहीं है। प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज के 30 छात्राओं के भरोसे काम चलाया। प्रबंधनीय अफसरों ने दावा किया था कि हर वार्ड में एक्सपर्ट रखने की बात कही थी ताकि प्रशिक्षु नर्सों को अनुभव मिल सके। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। ज्यादातर वार्डों में विशेषज्ञों की तैनाती नहीं होने से स्थिति बेकाबू है।

खबरें और भी हैं...