फसल बीमा की राशि कम मिलने को लेकर बीमा कंपनी के खिलाफ कांग्रेसियों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। जिला स्तर पर आंदोलन की शुरुआत मोहारा से की गई है। रविवार को जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने किसानों की इस पीड़ा को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने तत्काल इस मामले में बीमा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी।
कृषि उप संचालक ने क्षतिपूर्ति राशि कम मिलने पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि अनावारी से नहीं बल्कि फसल कटाई के प्रयोग के आंकड़ों से बीमा राशि तय होती है।
कांग्रेस द्वारा शनिवार को मोहारा में प्रदर्शन के दौरान सरकार को कोसा गया। इस दौरान जिला अध्यक्ष नवाज खान मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सरकार आम जनता और किसानों के साथ लगातार धोखाधड़ी करती आ रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में जो घोषणा पत्र में लिखा गया उसका पालन अब तक नहीं हो पाया है। वहीं वर्तमान में बीमा कंपनी ने जो धोखाधड़ी की है, उस पर तो कार्रवाई होनी चाहिए। प्रीमियम के समय सिंचित को 42 हजार और असिंचित को 35 हजार रुपए देने की बात कही गई। अब जब देने की बारी आई तो अनियमित बहुत कम राशि किसानों के खाते में डाली जा रही है। इस दौरान पूर्व मंत्री धनेश पटिया, शोभाराम बघेल, विवेक वासनिक, जिला पंचायत सदस्य क्रांति बंजारे, सुलोचना मारकंडे, कमलेश वर्मा, बाबूलाल, पंकज बांधव, शिशुपाल व अन्य मौजूद रहे।
अब यहां प्रदर्शन: 20 मई को छुरिया, 21 को कोकपुर, 22 करे उमरवाही व कुमर्दा, 23 को बांधाबाजार व चौकी, 25 को मुढ़ीपार व ढारा में सभा लेंगे। इसके बाद कांग्रेस का प्रदर्शन गांवों में होगा।
कांग्रेसियों ने मोहारा में की सभा, बीमा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की रखी मांग
सभा को संबोधित करते अतिथि।
डीडीए ने कहा- ऐसे तय होती है बीमा राशि
दूसरी ओर डीडीए अश्वनी बंजारे ने बताया कि बीमा योजना में मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि अनावारी के आधार पर तय नहीं होती अपितु फसल कटाई प्रयोग के आधार पर तय होती है। कुछ किसानों में भ्रम है कि अनावारी के आधार पर क्षतिपूर्ति तय होती है लेकिन ऐसा नहीं है। इसके लिए फसल कटाई प्रयोग किया जाता है। सिंचित धान में 2 फसल कटाई प्रयोग पटवारी द्वारा तथा 2 फसल कटाई प्रयोग ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा किए जाते हैं। 4 बार होने वाले इस प्रयोग का औसत कर वास्तविक उपज निकाली जाती है। प्रत्येक ग्राम पंचायत के विगत सात वर्षों के उपज के आंकड़े निकाले जाते हैं। इनमें दो आपदा वर्ष हटा दिए जाते हैं। इसकी औसत उपज को थ्रेसहोल्ड उपज कहा जाता है। इस थ्रेसहोल्ड उपज से बीमा दावा तय होता है।
सांसद ने दिए जल्द भुगतान के निर्देश
इधर सांसद अभिषेक सिंह ने फसल बीमा की राशि जल्द दिलाने के लिए अफसरों को निर्देश दिए। वीसी से उन्होंने राजस्व, कृषि व बैंक अफसरों की बैठक लेकर बीमित किसानों के लिए प्राप्त फसल बीमा की राशि को जल्द से जल्द खातों में डालने कहा। जिले के सूखा प्रभावित किसानों के लिए प्राप्त सूखा राहत की राशि किन्ही कारणों से प्राप्त करने हेतु शेष रह गए किसानों के संबंध में जानकारी ली।