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नर्संे हड़ताल पर, निजी नर्सिंग कॉलेज की 30 छात्राओं के भरोसे छोड़ दिए मेडिकल कॉलेज

3 वर्ष पहले
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स्टॉफ नर्सेस की अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाते ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल व्यवस्था गड़बड़ा गई है। खानापूर्ति के प्रबंधन ने निजी नर्सिंग कॉलेज की 30 छात्राओं को बुला रखा है। लेकिन अनुभव की कमी के कारण ये छात्राएं व्यवस्था बनाए रखने में कारगर साबित नहीं हो पा रही है। ये छात्राएं मरीजों को ठीक तरह से इंजेक्शन भी नहीं लगा पा रही है। ग्लूकोज बाटल चढ़ाने के लिए भी 5-6 के ग्रुप में काम कर रही है। इन हालातों में अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाना संभव नहीं लग रहा है।

व्यवस्था बनाने में दिक्कत इसलिए भी हुई क्योंकि शासकीय नर्सिंग कॉलेज में गर्मी की छुट्टियां चल रही है। अधिकांश स्टूडेंट्स अपने-अपने घर लौट चुकी है। ऐसे में प्रबंधन ने निजी कॉलेज की छात्राओं को व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी दी। लेकिन प्रैक्टिकल अनुभव कम होने की वजह से निजी कॉलेज की छात्राएं मरीजों का इलाज करने में सक्षम साबित नहीं हो रही है। अस्पताल प्रबंधन के अफसर भी इस ओर सख्ती नहीं बरत रहे है। हड़ताल के पहले दिन मरीजों को ग्लुकोज़ बोतल बदलवाने के लिए भी घंटों तक इंतजार करना पड़ा।

400 बेड के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अव्यवस्था के कारण मरीज हुए परेशान

120 में से 95 नर्सेस गई हड़ताल पर

समान प्रशिक्षण, समान वेतन, नर्सिंग एलाउंस छग में लागू करने समेत 6 सूत्रीय मांगों को लेकर नर्सेंस ने शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दिया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 120 नर्स कार्यरत है, इसमें से 95 नर्स हड़ताल में शामिल हुई। बताया गया कि रायपुर में मांगों को लेकर नर्सेस एकजुट होकर आंदोलन कर रही है।

जिसे अधिक जरूरत, उसे हम दे रहे प्राथमिकता

प्रबंधनीय अफसरों की मानें तो स्टॉफ नर्सेस की कमी की वजह से फिलहाल इमरजेंसी केसेज को ही कवर किया जा रहा है। यानी जिन मरीजों को इलाज की सख्त जरूरत है उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। सामान्य मरीजों को दवाइयां देकर भेजा रहा है। इमरजेंसी केसेज में डिलवरी, एक्सीडेंट और हेड इंज्युरी आदि को शामिल किया गया है।

घुमका स्वास्थ्य केंद्र में ठीक रही व्यवस्था

राजनांदगांव.मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में नर्सों की हड़ताल से व्यवस्था चरमराई।

घुमका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्टाफ नर्स की संख्या 9 है इसमें से दो स्टाफ नर्स हड़ताल पर गई है। 7 स्टाफ नर्स ड्यूटी पर है यहां 7 मरीज एडमिट है लूज मोशन उल्टी दस्त खून की कमी टाइफाइड से संबंधित मरीज यहां इलाज करा रहे हैं। हिम्मत यादव इराईखुर्द, कीर्ति वर्मा गोपालपुर नम्रता साहू, कलेवा दुर्गाबाई धौराभाठा, योगिता साहू उपरवाह, बीरसिंह वर्मा बरबसपुर, रघु वर्मा बहराभाटा ने बताया कि इलाज हो रहा है स्टाफ नर्स ड्यूटी दे रहे हैं।

बच्चे को नहीं दी गई दवा चक्कर काटता रहा पिता

नर्सेस की हड़ताल पर रहने की वजह से अस्पताल में भर्ती ज्यादातर मरीजों को समय पर इलाज की सुविधा नहीं मिल पाई। जीतू देवांगन ने बताया कि उसके बच्चे को पेट में दर्द था। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं इलाज में लापरवाही बरतती नजर आई। सीधे डॉक्टरों से चर्चा करने के बाद इलाज शुरू हो पाया।

प्रतिदिन ओपीडी में पहुंचते हैं 700 मरीज व अटेंडेंट

मेडिकल कॉलेज में मर्ज होने के बाद अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। प्रतिदिन 700 मरीज ओपीडी में पहुंचते है। नियमित इलाज व मरीजों के देखभाल के लिए प्रत्येक वार्ड में शिफ्ट वाइस 8 नर्सों की ड्यूटी लगाई जाती है। वार्डों में मरीजों की संख्या बढ़ने से काम का दबाव बढ़ गया है। नर्सेस की हड़ताल पर चले जाने से व्यवस्था बिगड़ चुकी है।

फैक्ट फाइल

10 सीएचसी की संख्या

48 पीएचसी की संख्या

312 उप स्वास्थ्य केंद्र

500 स्टाफ की संख्या

55 डॉक्टरों की संख्या

(स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी अनुसार)

सीधी बात

डॉ. प्रदीप बेक, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज

मार्गदर्शन के लिए एक्सपर्ट को तैनात किया गया है

नर्सेस हड़ताल पर है, अस्पताल में व्यवस्था बनाने क्या किया गया?

-हमने प्राइवेट नर्सिंग होम की 30 छात्राओं को बुलाया है।

सिर्फ निजी, शासकीय कॉलेज से क्यों नहीं?

-शासकीय कॉलेज का अवकाश चल रहा है।

अनुभव की कमी के कारण ज्यादातर छात्राएं ठीक से इलाज नहीं कर पा रही हैं?

-हां अनुभव की कमी तो है, मार्गदर्शन के लिए उनके साथ एक्सपर्ट को तैनात किया गया है।

इमरजेंसी केसेज को कैसे ट्रीट कर रहे हैं?

-जैसी व्यवस्था है उस लिहाज से इमरजेंसी केसेज को प्राथमिकता दी जा रही है।

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