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हेड इंज्युरी का मरीज, ओपीडी में चार बार गिरा, पत्नी बोली- कोई तो इलाज कर दो

3 वर्ष पहले
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मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में मानवीय संवेदना दरकिनार हो गई है। अमानवीयता का बड़ा चेहरा सोमवार को हॉस्पिटल के ओपीडी काउंटर में दिखा। जहां सीवियर हेड इंज्युरी के बाद झटके की शिकायत पर पहुंचे मरीज को चेकअप के लिए सामान्य मरीजों के पीछे लाइन में खड़ा कर दिया गया। लाइन में खड़े-खड़े ही मरीज को फिर झटका आ गया, इसके बाद आपातकालीन वार्ड में शिफ्ट किया गया।

मरीज की प|ी बिलखकर ओपीडी में ही चिल्लाती रही कि सुबह से उनको चार बार झटका आ चुका है, उसने डॉक्टरों को भी ये बात बताई है। इसके पहले उन्हेंं ओपीडी पर्ची के लिए काउंटर में जूझना पड़ा। सभी को बताया हालत गंभीर है, लेकिन कोई भी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं हुआ। मोहला से अपने छोटे से बच्चे के साथ पति मोहन कुमार गंधर्व को लेकर आई प|ी की परेशानी देख अन्य मरीजों की आंखें भर आई।

अमानवीयता की दर्दनाक तस्वीर सामने आई

राजनांदगांव. ड्रेसिंग कराने इस तरह अस्पताल में लग रही लाइन।

पिता को सहारा देकर वार्डों में घूमाता रहा बेटा

मोहन की प|ी ने बताया कि अपने प|ी को एडमिट करने की तैयारी के साथ वह हास्पिटल आई है। बेटा अपने पापा को सहारा देकर हॉस्पिटल के भीतर लाया। पर्ची कटाने के बाद से उसने तीन से चार चेंबरों में चक्कर काट लिया। बेटा अपने पिता को सहारा देकर पैदल चला रहा है। गंभीर स्थिति के बाद भी किसी ने ध्यान नहीं दिया।

इधर गर्भवतियों को दिखा दिया रायपुर का रास्ता

रविवार की देर रात प्रसव पीड़ा से तड़पती 5 महिलाएं अलग-अलग ब्लाॅक से हॉस्पिटल पहुंची। लेकिन ऑपरेशन नहीं होने की बात कहकर उन्हें सीधे रायपुर रेफर किया गया। ऐसे में मानपुर मोहला से पहले ही 100 किम तय कर पहुंची गर्भवतियों को रायपुर के लिए 65 किमी. का रास्ता जोखिम के बीच ही तय करना पड़ा।

रैबिज वैक्सीन भी यहां उपलब्ध नहीं

इधर सीजीएमएससी से एंटी रैबिज वैक्सीन की खेप भी नहीं पहुंची है। इसके चलते कुत्तों के काटने से आने वाले मरीजों का इलाज भी नहीं हो पा रहा है। एंटी रैबिज वैक्सीन के लिए मरीजों को निजी दुकानों की ओर दौड़ना पड़ रहा है। जहां भी वास्तविक कीमत से दोगुने दाम पर एंटी रैबिज वैक्सीन बिक रही है। वैक्सीन कब तक पहुंचेगी इसे लेकर भी कोई जवाब हॉस्पिटल प्रबंधन के पास नहीं है।

ड्रेसिंग के लिए भी कतार

इधर मेडिकल हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में भी ड्रेसिंग के लिए कतार लग रही हैं। चोटिल लोगों को ड्रेसिंग कराने के लिए स्ट्रेचर पर ही इंतजार करना पड़ रहा है। अगर कोई मरीज इसका विरोध करे या इस वेटिंग का कारण पूछे तो अस्पताल प्रबंधन के पास सिर्फ नर्सों की हड़ताल पर होने का ही जवाब है। जबकि प्रबंधन हड़ताल को देखते हुए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था का दावा कर रही है।

मैं इसकी जानकारी लेता हूं

गंभीर मरीज को सीधे आपताकालीन सेवा दी जाती है, ऐसा हुआ है तो मैं जानकारी लेता हूं। नर्सों के हड़ताल पर होने से गर्भवतियों का ऑपरेशन बंद है। मरीज स्वयं ही निजी अस्पतालों में जा रहे हैं, वहीं हम रायपुर रेफर कर रहे हैं। डॉ. प्रदीप बेग, अधीक्षक मेडिकल अस्पताल

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