नारी सशक्तिकरण पर आधारित छत्तीसगढ़ी नाटक कुंती के परिताप पर आयोजित 10 दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष हेमा देशमुख के हाथों हुआ। अध्यक्षता नगर निगम सभापति शिव वर्मा ने की। मुख्य अतिथि देशमुख ने कहा कि नारियों को हर काल में संताप झेलना पड़ा है। हालांकि पुराने समय में नारियों को देवी के समान पूजा जाता था।
इसके बाद भी सतयुग में सत्यवादी राजा हरिशचन्द्र की रानी तारामती, सती माता अनुसुईया, सावित्री आदि से लेकर त्रेता में माता सीता, अहिल्या, द्वापर में माता कुंती व द्रोपदी आदि संताप झेलने वाली नारियां इसके उदाहरण हैं। आलम यह रहा कि महाभारत काल में सामाजिक बंधन व मर्यादा के चलते अपने कोख से उपजाये बेटे कर्ण को माता कुंती बेटा कहने का साहस नहीं जुटा पाई थी।
इसी प्रसंग पर आधारित नाट्क कुंती के परताप पर कार्यशाला का शुभारंभ होने को उन्होंने सुखद एवं लोकनाट्य एवं रंगकर्म के लिए संवर्धनकारी बताते हुए नाट्क की सफलता की कामना की। सभापति श्री वर्मा ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं में प्रतिभाएं निखर का सामने आती हैं। उन्होंने मंदराजी दाऊ के नाचा के जमाने की याद ताजा करते हुए इस दौरान के गीत गोड़ के गवांगे .. बिछिया.. का सस्वर गान कर माहौल को तरंगित किया।
कुंती के परिताप नाटक पर कार्यशाला शुरू, 26 को पद्मश्री गोविन्दराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में होगी रंगारंग प्रस्तुति
राजनांदगांव. कार्यशाला में नारी सशक्तिकरण पर प्रस्तुति देते कलाकार।
रंगारंग मंचन होगा: कार्यक्रम का संचालन कर रहे साहित्यकार आत्माराम कोशा ने अतिथियों से सभी कलाकारों का परिचय कराया। कहा कि नारी संताप पर आधारित यह प्रसंग अब तक अछूता रहा जिस पर सुप्रसिद्ध लोक संगीत निदेशक देवी लाल नाग के निर्देशन में नाट्क कुंती के परिताप द्वारा कोपल सांस्कृतिक एवं सेवा समिति द्वारा आज के परिपेक्ष्य में कुछ कहने का प्रयास किया गया है। रंगारंग मंचन 26 मई को पद्मश्री गोविन्दराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में होगा।
कार्यक्रम में सुरीली तान ने लोगों को मंत्रमुग्ध किया
कार्यक्रम को वार्ड पार्षद सुनीता साहू एवं सचिव चन्द्रिका प्रसाद सिन्हा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका जयंती यादव ने अपनी मीठी सुरीली तान से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। इस दौरान संगीतकार देवीलाल नाग सहित भूषण नेताम, चैतराम डहरिया, चतुर सिंह बजरंग, गणेश निषाद आदि ने अपने-अपने वाद्य यंत्रों से उन्हें संगत दी। कार्यक्रम में बांस गीत गायक एवं वादक विक्रम यादव, गायिका मीना निषाद, कलाकार अगेश नाग, संगीता नाग, श्यामलाल बजरंग, मिथुन खोटे, सुदेश यादव, उर्वशी साहू, अर्जुन परमार, रितु यदु मैाजूद रहे।