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देवता भी उस मनुष्य को नमस्कार करते हैं जिसमें मनुष्यत्व हैै: मणि

3 वर्ष पहले
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जैन साध्वी मणिप्रभा श्रीजी ने कहा कि सम्यक दर्शन के रूप में असली मैं की पहचान जब हो जाती है तो यह शरीर किराए का मकान लगने लगता है। उन्होंने कहा कि बुद्धि क्या है, संसार की सच्चाई क्या है, यह सब व्यक्ति जानता है। हमारी आंखों के सामने हमारा बचपन मर गया। जो थे वे हैं नहीं, अब जो हैं वह रहेगा नहीं, संसार में सब कुछ बदल रहा है। मोह माया में मनुष्य जीवन प्राप्त करने के बाद भी हमें फेल होना पड़ रहा है।

साध्वी ने आज जैन बगीचे में अपने प्रवचन में कहा कि जगत का पानी छानने के लिए हम अपनी बुद्धि कितना खपाते हैं। पुण्य का खर्च और पाप की कमाई के लिए हम कितना समय अपना गंवाते हैं। कोई बिरला व्यक्ति ही होता जो सच को जीने में अपना समय लगाता है। देवता भी उस मनुष्य को नमस्कार करते हैं जिसमें मनुष्यत्व है, करुणा का भाव है, दीन दुखियों के प्रति अनुकंपा का भाव है। उन्होंने कहा कि शरीर चलता फिरता मकान है। ईंट, चूने और पत्थर के लिए अपने बेटे का मोह बढ़ गया और बाप के बेटे के प्रति द्वेष बढ़ गया। उन्होंने कहा कि जड़ वह है जिसमें ज्ञान नहीं है, जान नहीं है। यह शरीर मोक्ष के लिए लिए मोक्ष के लिए लिए के लिए लिए उपयोगी है आपको जो कुछ दिया है, बांटने के लिए दिया है। धन्य है वह व्यक्ति जो संसार में रहकर भीतर के आत्म ज्ञान को जागृत करते हैं। विदाई तो हम सब की तय है किंतु यह कब और कैसे होगी , यह कोई नहीं बता सकता।

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