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क्षमता के हिसाब से ग्रेडिंग, फिर होगी मरम्मत

3 वर्ष पहले
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जिले में स्थित लघु जलाशयों, व्यपवर्तन व डायवर्सन की क्षमता लगातार घट रही है। इसके कारण सिंचाई क्षमता भी कम हो गई है। विभाग ने ऐसे लघु योजनाओं का सर्वे करने के बाद सुधार के लिए योजना बनाई है। इससे जलाशयों की क्षमता बढ़ने से नहरों की मरम्मत कर सिंचाई का रकबा भी बढ़ेगा।

इसके लिए जल संसाधन विभाग के सहायक व उप अभियंताओं को ट्रेनिंग दी गई है। 14 मई से टीमोंं ने सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है। विभाग के लघु सिंचाई योजनाओं की क्षमता 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो गई है। सिंचाई सुविधा को विस्तार देने के लिए जिले के 361 योजना का निर्माण किया गया है। ग्रेडिंग के बाद मरम्मत का काम किया जाएगा। जिले के 9 ब्लॉकों में 361 एनीकट व माइनर जलाशय से सिंचाई की सुविधा दी जा रही है। लंबे समय से इन जलाशयों का मेंटेनेंस नहीं कराए जाने से सिंचाई का रकबा घटा है। इसके लिए टीम में 79 उप अभियंता और सहायक अभियंताओं की ड्यूटी लगाई गई है। कलेक्टर भीम सिंह ने विभाग की टीम को इसके लिए निर्देश दिया है। सुधार के लिए राशि राज्य शासन से तय की जाएगी। इसके लिए तीन स्तर निर्धारित किए गए हैं। जल संसाधन विभाग के ईई एसके सहारे ने बताया कि सर्वे के बाद जिन जलाशयों की क्षमता सबसे कम है, उसका पहले मरम्मत कराने के लिए पहल की जाएगी।

मिलेगी सुविधा

सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता व उप अभियंताओं को दी गई इसके लिए ट्रेनिंग

पांच चरणों में काम करने का समय तय

ग्रेडिंग करने के लिए सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट भी बनाई

दूसरे चरण में जलाशयों की ग्रेडिंग की जानी है। इसके लिए सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट भी बनाई गई है। प्रमुख अभियंता की अध्यक्षता में कोर टीम भी गठित की गई है। सर्वे के आधार पर ही अधिकारी ग्रेडिंग तय करेंगे। उसके आधार पर ही मरम्मत कार्य कराया जाएगा। इसके लिए जिम्मेदारों को ट्रेनिंग मिल चुकी हैं। सर्वे टीम यह पता लगाएगी कि सिंचाई क्षमता व जल भराव क्षमता में कमी क्यों आई है। इसके अनुसार ही मरम्मत की प्लानिंग की जाएगी। इससे पुरानी योजनाओं का जीर्णोद्धार हो जाएगा।

डी ग्रेड को देंगे प्राथमिकता इसमें जनसहयाेग भी लेंगे

जिस डायवर्शन या जलाशय को डी ग्रेड मिलेगा उसकी मरम्मत के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। सर्वे में यह पता चलेगा कि सिल्ट जमा होने से भराव क्षमता कम हुई है तो उसकी खुदाई के लिए जनसहयोग भी लिया जा सकता है। नहरों की मरम्मत के लिए पहल होगी ताकि पानी खेतों तक जा सके। चार ग्रेड तय किए गए हैं। इसमें 80 फीसदी से ऊपर सिंचाई सुविधा देने वाले जलाशय को ए ग्रेड, 80 से 60 फीसदी सुविधा वाले जलाशय बी, 40 से 20 फीसदी वाले सी और 20 फीसदी से शून्य वाले को डी ग्रेड में रखा गया है।

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