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प्रसूति वार्ड में ऑपरेशन बंद, बमुश्किल सिर्फ सामान्य प्रसव हो रहा अस्पताल में

3 वर्ष पहले
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जिस प्रसूति वार्ड में कदम रखने की जगह नहीं रहती थी, वहां इन दिनों खाली बेड की कतार नजर आ रही है। नर्सों की हड़ताल के कारण मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजर डिलवरी सुविधा बंद कर दी गई है। गिने-चुने गर्भवतियों का सामान्य प्रसव कराया जा रहा है। यदि भूले भटके गर्भवती को लेकर परिजन पहुंच भी रहे तो उन्हें निजी अस्पताल में जाने की सलाह दी जा रही है। निजी नर्सिंग होम्स में परिजनों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।

अस्पताल के पुरुष-महिला मेडिकल और सर्जिकल, शिशु वार्ड की हालात कुछ ऐसी ही है। असहाय गर्मी होने के बाद भी वार्डों में बेड खाली दिखाई दे रहे हैं। कारण चिकित्सीय सुविधा का अभाव। मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था बनाए रखने में स्टाफ नर्सेस का काफी योगदान है। उनके अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाते ही व्यवस्था लड़खड़ा गई है। स्टाफ नर्सेस के एवज में निजी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं को बुलाया गया है, लेकिन इससे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है। ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या घटी है। ज्यादातर मरीज निजी अस्पतालों की तरफ रूख कर रहें है।

15 से 20 डिलवरी होती है हर रोज

मेडिकल कॉलेज में मर्ज होने के बाद अस्पताल ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। डिलवरी केसेस भी बढ़े हैं। प्रतिदिन औसतन 15 से 20 डिलवरी अस्पताल में होते हैं। इसमें आधे सीजर और आधे सामान्य प्रसव रहते हैं। लेकिन नर्सों की हड़ताल की वजह से अस्पताल में सामान्य प्रसव ही बमुश्किल हो पा रहा है।

फिलहाल हम इमरजेंसी केसेस ले रहे हैं

नर्सेस की हड़ताल की वजह से सीजर डिलवरी फिलहाल नहीं किया जा रहा है। यदि कोई इमरजेंसी केसस में सुविधा दी जा रही है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए नर्सिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स को बुलाया गया है। डॉ. प्रदीप बेक, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल

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