पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Bhilai
  • कचरे से लाखों की कमाई रोजाना निकलने वाले कचरे से बना रहा आर्गेनिक खाद, रायपुर बिलासपुर में हो रही सप्लाई

कचरे से लाखों की कमाई रोजाना निकलने वाले कचरे से बना रहा आर्गेनिक खाद, रायपुर बिलासपुर में हो रही सप्लाई

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हमारे शहर में आने वाली पीढ़ी को कचरे का पहाड़ देखने की बुरी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा, चाहे शहर से रोजाना कितना भी कचरा क्यों न बाहर आए। इसके लिए नगर निगम ने सॉलिड वेस्ट का बेहतर मैनेजमेंट तैयार किया है। जो अब इस गति से दौड़ रही है कि रोजाना 60 टन कचरा शहर से निकलने के बावजूद सालों पुराने 10 एकड़ के कचरा डंपिंग ग्राउंड को खत्म कर दिया है।

ये पूरी व्यवस्था सालभर पहले बाबूटोला में बने कचरा निष्पादन प्लांट से बदली है। जहां रोजाना 60 टन कचरे को कुछ घंटों में ही सेग्रिकेशन के बाद कमाई का जरिया बनाया गया है। प्लांट में गीले कचरे से आर्गेनिक खाद तैयार हो रही है, जो रायपुर और बिलासपुर तक सप्लाई हो रही है। वहीं सूखे कचरे से निकलने वाले वेस्ट को बेचकर भी निगम मुनाफा कमा रही है। रोजाना बड़ी मात्रा में निकल रहे कचरे का कोई भी हिस्सा गंदगी और प्रदूषण फैलाने के लिए नहीं बच रहा है। इसी वजह से कभी 10 एकड़ जमीन पर कचरे के पहाड़ के रुप में जमी गंदगी का पूरी तरह खात्मा हो गया है।

निगम ने 5 करोड़ रुपए खर्च पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है। इसमें पीपीपी मॉडल के तहत निजी फर्म के माध्यम से कचरे का निष्पादन किया जा रहा है। स्वच्छता मिशन के लिए भारत सरकार द्वारा बनाए प्रतिनिधि मंडल ने भी जायजा लिया, अब दूसरे शहरों में भी इसे लागू करने की प्लानिंग की जा रही है।

रोज निकल रहा 60 टन कचरा, फिर भी निपटारे का मैनेजमेंट ऐसा कि शहर बना जीरो लैंड फील, नहीं दिख रहा कचरे का ढेर

राजनांदगांव. बाबूटोला में बने कचरा निष्पादन प्लांट का मिल रहा लाभ।

रोजाना 250 टन कचरे का निष्पादन

वर्तमान में प्लांट में 60 टन कचरे का सेग्रिकेशन रोजाना कुछ घंटों में हो रहा है। लेकिन प्लांट की क्षमता रोजाना 250 टन कचरा निष्पादित करने की है। एक्सपर्ट के मुताबिक शहर से आने वाले 25 साल में भी इतना कचरा निकलने की आशंका नहीं है। इसके अलावा प्लांट की क्षमता को बढ़ाने के लिए भी पहले ही सिस्टम तैयार कर लिया गया है।

ऐसे समझिए कचरे से कमाई का गणित

गीला कचरा: गीला कचरा सेग्रिकेशन के बाद आर्गेनिक खाद में तब्दील हो रही है। 100 किलो गीले कचरे से 25 किलो खाद बनाई जा रही है। इसे रायपुर और बिलासपुर में बेचा जा रहा है। प्लांट को संचालित कर रहे अग्रवाल फर्म ने अब तक 25 टन से अधिक खाद सप्लाई कर दिया है। 10 फीसदी मुनाफा निगम को मिल रहा है। 6 महीने में इससे 2.50 लाख रुपए का मुनाफा हाथ लगा।

प्लांट से रोजाना कचरे का निपटारा

प्लांट के माध्यम से रोजाना बड़ी मात्रा में गीले और सूखे कचरे का निपटारा किया जा रहा है। इसकी शुरुआत के बाद हमने 10 एकड़ में फैले डंपिंग ग्राउंड को खत्म कर दिया है। आगे कभी भी कचरे का पहाड़ निर्मित होने की स्थिति नहीं आएगी। अश्वनी देवांगन, आयुक्त नगर निगम

सूखा कचरा: सूखे कचरे में निकलने वाले प्लास्टिक, बोतलों और गत्तों सहित अन्य सामानों को अलग कर बेचा जा रहा था। इससे निगम ने बीते 6 महीने में 5 लाख रुपए तक का मुनाफा कमाया। इसके अलावा प्लास्टिक के कचरे को बारीकी से काटकर इसे डामरीकरण में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे लिए भी प्लास्टिक दूसरे शहरों तक पहुंच रहा है। मिक्सिंग से बनने वाली सड़क की मजबूती बढ़ जाती है।

खबरें और भी हैं...