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बिजली बिल में धोखाधड़ी: ईई से छीना गया जांच का जिम्मा

3 वर्ष पहले
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बिजली कंपनी में आम उपभोक्ताओं के बिल से हुई धोखाधड़ी की जांच शुरू हो गई है। पहले जांच के लिए ईई वायएसआर मूर्ति को जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन चीफ इंजीनियर ने दो दिन बाद ही उन्हें जांच अधिकारी के जिम्मेदारी से हटा दिया है। अब मूर्ति की जगह दो अन्य अफसरों को इसकी जांच सौंपी गई है।

इधर उपभोक्ताओं से खपत से अधिक राशि वसूलने की गड़बड़ी पश्चिमी डिवीजन के अलावा पूर्व डिवीजन में हुई है। इसकी पुष्टि शुरुआती जांच में की गई है। इसके बाद दोनों डिवीजन के 40 हजार उपभोक्ताओं के बीपी नंबर से राशि व खपत का मिलान शुरू किया गया है। ईई मूर्ति से जांच का जिम्मा छीनने को लेकर कंपनी ने तथ्य दिया है कि गड़बड़ी में ईई लेवल तक के अफसरों की संलिप्तता आ रही है। ऐसे में एक ईई के कार्यों और गड़बड़ी की जांच समान रैंक का अफसर नहीं कर सकेगा। गड़बड़ी की जांच के लिए 4 टीम बनाई है। इसमें एक तरह की टीम घरेलू उपभोक्ताओं व दूसरी कामर्शियल कनेक्शनधारियों के बिल जांच रही है।

20 लाख की गड़बड़ी

इधर, इस गड़बड़ी को लेकर सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक जांच में अब तक 20 लाख रुपए तक के गड़बड़ी की पुष्टि हो गई है। हालांकि कंपनी अब तक इस पर पुष्टि की मुहर नहीं लगा रही है। अफसरों का यह भी दावा है कि जांच पूरी होने के बाद राशि के आंकड़े दो से तीन गुने भी हो सकते हैं।

डोंगरगढ़-खैरागढ़ में भी होगी जांच: वहीं जिले के डोंगरगढ़ व खैरागढ़ ब्लॉक में भी ऐसी गड़बड़ी की आशंका कंपनी जाहिर कर रही है। दोनों नगरों में भी उपभोक्ताओं के बीपी नंबर की जांच शुरू हो सकती है। हालांकि कंपनी के अफसर केवल शहर के दोनों डिवीजन की जांच शुरू होने की बात कही है।

मामले की होगी जांच

मामले की जांच अब ईई मूर्ति नहीं कर रहे हैं। जांच के लिए दूसरे अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है। हाल में कामर्शियल कनेक्शनों की जांच पहले की जा रही है। लगभग 40 हजार बीपी नंबर की जांच होनी है। संजय पटेल, चीफ इंजीनियर, सीएसपीडीसीएल

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