मोह-माया छोड़ परमात्मा से जोड़ें नाता
राजपुर | मनुष्य जीवन अमूल्य है। इसे भक्ति के मार्ग पर लगाएं। ईश्वर का ध्यान करें। उसका धन्यवाद करें जो उसने आपको मनुष्य जीवन प्रदान किया। चौसठ लाख योनियों के बाद ये मनुष्य जीवन प्राप्त होता है। इसे व्यर्थ ना जाने दें। सांसारिक मोह-माया छोड़कर उस परमात्मा में अपनी लौ लगाएं। ताकि आपको जीवन चक्र से मुक्ति मिल सके। व आपको मोक्ष की प्राप्ति हो। संत सिंगाजी परचरी पुराण कथा के चौथे दिन यह बातें कथा वाचक जीवन लता खेड़े ने कही। संत श्रीसिंगाजी ने निर्गुण भक्ति का प्रसार किया। परचरी पुराण कथा में प्रति दिन सवा क्विंटल हलवे की प्रसादी वितरित की जा रही है। इसी कड़ी में कथावाचक को आशीष बर्मन सप|िक वस्त्र दान किए। कथा के समापन पर भंडारे का आयोजन भी रखा।