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प्रभु द्वारकाधीश मंदिर में पुरुषोत्तम मास के मनोरथों का बंटवारा, अलग-अलग दो सूची जारी, वैष्णव संशय में
श्री पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास प्रभु श्री द्वारकाधीश मंदिर कांकरोली के प्रभु द्वारकाधीश के अधिक ज्येष्ठ मास को लेकर भगवदप्रीत्यर्थ एवं सुखार्थ विशिष्ट मनोरथ के लिए पीठाधीश ब्रजेशकुमार की आज्ञा के अनुसार शनिवार को पुरुषोत्तम मास के मनोरथों की सूची जारी की गई। जबकि चार दिन पहले ही गोस्वामी परिवार के गृहाधीश परागकुमार और शिशिरकुमार ने मनोरथों का बंटवारा करते हुए पुरुषोत्तम मास के 20 दिन के ही मनोरथों की सूची जारी की थी। ऐसे में तृतीय पीठ प्रन्यास प्रभु द्वारकाधीश कांकरोली मंदिर में अधिकमास को लेकर दो अलग-अलग सूची जारी होने से वैष्णवों में संशय की स्थिति पैदा हो गई है। द्वारकाधीश मंदिर ट्रस्ट के जयेश भाई ने बताया कि अधिक ज्येष्ठ पुरुषोत्तम मास में प्रभु श्री द्वारकाधीश के पूरे मास 30 दिवसीय मनोरथ मनाए जाएंगे। 16 मई से लेकर 13 जून तक मनोरथ में फूल मंडली हिंडोला महोत्सव से लेकर जल विहार, घटा में हिंडोला, कमल तलाई, चीरहरण जल विहार, नाव मनोरथ, गौचारण मनोरथ सहित 30 दिन के मनोरथ मनाए जाएंगे। गौरतलब है कि गोस्वामी परिवार के तीनों भाईयों में विवाद के चलते पहले पीठाधीश ब्रजेशकुमार की आज्ञा लिए बिना ही गोस्वामी परागकुमार व शिशिरकुमार ने तीनों भाईयों में 10-10 दिन के मनोरथों का विभाजन करते हुए 26 मई से लेकर 13 जून तक के 20 दिनों की मनोरथ सूची जारी कर दी थी। इसमें पीठाधीश गोस्वामी ब्रजेशकुमार के लिए पुरुषोत्तम मास के प्रथम 10 दिन छोड़कर जारी की गई थी। जबकि प्रन्यास के कानूनी प्रावधान के अनुसार बिना पीठाधीश्वर की आज्ञा अलग से मनोरथ नहीं मनाया जा सकता है।
द्वारकाधीश मंदिर में 30 दिन में ये मनाेरथ होंगे
ट्रस्ट की ओर से जारी सूची में 16 मई को फूल मंडली हिंडोला, 17 को रथयात्रा कांच का बंगला, 18 को बंगला घनगौर सवारी, 19 को बंगला श्रावण भादो झूला, 20 को चीरहरण जल विहार, 21 को बंगला घटा में हिंडोला, 22 को बंगला जल विहार, 23 को पलना चांदी की बाराद्वरी में सांगामाची, 24 को खसखना रमणरेती, 25 को पवित्रा जमना तट पर झूले, 26 को बंगला मयूरासन, 27 को बंगला कमल तलाई, 28 को सेवाकुंज पनघट, 29 को बंगला शरदरास, 30 को बंगला षटऋतु, 31 को बंगला गुंजावन, 1 जून को बंगला काष्ठ के नौ महला में गणगौर, 2 जून को बंगला पुष्पवितान, 3 को कुंज में फूलफाग जल विहार गोप बंगला पर, 4 को चांदी की बाराद्वरी विवाह, 5 को मोती की बंगला इंद्रमान भंग, 6 को महादान फल-फूल का बगीचा झूला, 7 को बंगला सांझी, 8 को पलना चांदी का नौमहला, 9 को गौचारण मनोरथ, 10 को नाव मनोरथ, 11 को बंगला राजभोग, 12 को बंगला राजलीला और 13 जून को बंगला दीपदान मनोरथ होगा।
राजसमंद . द्वारकाधीश मंदिर मंडल के ट्रस्टी अधिक मास के मनोरथों की जानकारी देते। ं
दोनों परिवारों में फिर बनी विवाद की स्थिति
गौरतलब है कि प्रभु द्वारकाधीश में आग की घटना के बाद पीठाधीश ब्रजेशकुमार और दूसरे पक्ष गोस्वामी परिवार के उनके भाई शिशिर कुमार और पराग कुमार के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। दो साल पहले गोस्वामी शिशिर कुमार और पराग कुमार ने मंदिर पहुंचकर मंदिर के गर्भगृह से एक प्रतिमा निकाली थी। मंदिर के गर्भगृह में दो प्रतिमा होने से विवाद बढ़ता देख प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए एक प्रतिमा को मंदिर में ही सील बंद कर रख दिया था। इसके बाद इन दोनों परिवारों के बीच विवाद बढ़ता गया। एक बार पुन: अधिकमास को लेकर दो सूची होने पर वैष्णवों के बीच संशय की स्थिति बन गई है। दोनों पक्षों ने अधिक पास को लेकर मंदिर में मनोरथों को लेकर अलग-अलग सूची जारी कर दी है। ऐसे में दो सूची जारी होने पर दोनों सूचियों में अलग-अलग मनोरथ दर्शाए गए हैं। इससे वैष्णवजन संशय में है कि दोनों मनोरथ अलग-अलग समय में है। ऐसे में ठाकुरजी को दोनों जगह एक ही समय कैसे ले जाया जाएगा।
आठ साल बाद ठाकुरजी दो दिन के लिए पधारेंगे विठ्ठलविलास बाग
प्रभु द्वारकाधीश पुरुषोत्तम मास में मंदिर से 9 जून को सुखपाल में पधारकर विठ्ठलविलास बाग में गौचारण मनोरथ करेंगे। 10 जून को नाव मनोरथ किया जाएगा। ठाकुरजी 8 वर्ष बाद दो दिन तक विठ्ठलविलास बाग में रहेंगे।
बिना पूछे सूची जारी की
तृतीय पीठ प्रन्यास पर तीनों ही भाईयों का बराबर के हक है। अधिक मास के 19 दिन मनोरथ हमारे होगें और 10 दिन के मनोरथ ब्रजेशकुमार के होंगे। हमें बिना पूछे अधिक मास के मनोरथों की सूची जारी की गई है। इसमें हमारा अधिकार समाप्त कर दिया। हम ये जानते हैं कि 26 मई से 13 जून तक के मनोरथ हमारी सूची के अनुसार होंगे। गोस्वामी नेमीषकुमार, तृतीय पीठ प्रन्यास प्रभु द्वारकाधीश मंदिर कांकरोली
ट्रस्ट के संविधान के अनुसार ट्रस्ट का मुखिया जो कार्यक्रम तय करता है, वहीं निर्धारित रहता है। नेमीष कुमार और पराग कुमार ने गलत किया। ट्रस्ट व्यक्तिगत नहीं है। भगवती लाल पालीवाल, मंदिर अधिकारी