बैठक में निजी स्कूलों मेंे हस्तक्षेप पर जताई चिंता
राजसमंद| गांधी सेवा सदन में मंगलवार को निजी स्कूलों की बैठक हुई। बैठक में जिला निजी शिक्षण संस्थान समिति के संयोजक डॉ. महेंंद्र कर्णावट ने बताया कि पिछले तीन दशक में निजी शिक्षण संस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ा है, इस कारण शिक्षण संस्थाओं के सुचारू संचालन में बाधाएं है। महंगी होती शिक्षा का मूल कारण राजकीय हस्तक्षेप एवं नीतियां है। निजी शिक्षण संस्थाओं को कंपनी की श्रेणी में लाकर उन पर सभी शुल्क, टैक्स, वेतन आयोग बाध्यता, भवन कर, इएसआई, मान्यता फीस, मान्यता के लिए मियादी जमा राशि को लेकर नियम लागू कर दिए गए है। इसमें सेवा भावना आहत हुई है और बाजारवाद ने प्रवेश किया है। डॉ. महेन्द्र कर्णावट ने बताया कि राजसमंद जिले में 400 निजी स्कूल है। इनमें से लगभग तीस स्कूलों की फीस तीस हजार रुपए वार्षिक है तो लगभग पांच स्कूलों की फीस तीस हजार से ज्यादा है जबकि 360 विद्यालयों की फीस पांच हजार से बीस हजार रुपए वार्षिक है। पाठ्य पुस्तकों के संदर्भ में डॉ. महेंद्र कर्णावट का कहना है कि एनसीईआरटी की ओर से मान्य पुस्तकों पर आईएस बीएन क्रमांक मुद्रित होते है जो इस बात का सूचक है कि एनसीईआरटी पुस्तक की पाठ्यसामग्री और मूल्य से सहमत है। एनसीईआरटी की ओर से प्रकाशित पुस्तकों में से 10वीं, 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में मात्र 20-25 प्रतिशत प्रश्न ही आते है। 75 प्रतिशत प्रश्न अन्य संदर्भ पुस्तकों से आते है, इसमें परीक्षार्थी की स्मरण- मानसिक दक्षता मुख्य है।