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आरके में संभाग की पहली हॉल बॉडी नेरोबेल्ट मशीन लगी, सोरायसिस मरीजों को होगा फायदा

3 वर्ष पहले
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आरके अस्पताल में संभाग की पहली हॉल बॉडी नेरोबेल्ट मशीन लगाई गई। मशीन से सफेद दाग, सोरायसिस और त्वचा से संंबंधित बीमारियों वाले रोगियों को लाभ मिलेगा। मशीन से त्वचा से संबंधित रोगियों को थैरेपी दी जाएगी। इससे शरीर में त्वचा से संबंधित निष्क्रिय सेल सक्रिय हो सेकेंगे।आरके अस्पताल के पीएमओ डाॅ. सीएल डूंगरवाल ने बताया कि काफी सारे लोग सफेद दाग होने से परेशान होते है। जो अपना इलाज नीम हकीमों से करवाते है। लेकिन फायदा नहीं मिलता है। काफी सारा पैसा भी व्यर्थ कर देते हैं। आरके अस्पताल में आरएमआरएस (राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी) की ओर से मशीन की खरीद की गई है। जो संभाग की पहली मशीन है। इससे सफेद दाग, सोरायसिस और त्वचा से संबंधित बीमारी के रोगियों का थैरेपी से इलाज होगा।

सोरायसिस के लक्षण

त्वचा पर आने वाले धब्बे चांदी के रंग के पपडिय़ों से आच्छादित रहते है।

छोटे पपड़ीले धब्बे

सूखी फटी हुई त्वचा इससे रक्तस्त्राव हो सकता है

खुजली, जलन

सफेद दाग के मरीजों की जिले में संख्या ज्यादा

आरके अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. . रोहित कटारिया ने बताया कि अस्पताल में अधिकांश मरीज सफेद दाग, सोरायसिस (लाल दापड़), धूप से होने वाली एलर्जी, त्वचा की बीमारी के करीब 80 से 100 मरीज आते है। इनमें अधिकांश सफेद दाग की बीमारियों के होते है। सफेद दाग की बीमारी से संबंधित बीमारी में मरीज के शरीर में त्वचा के रंग वाले सेल को निष्क्रिय होने से मरीज की त्वचा का रंग बदलने लग जाता है। इसके साथ ही सोरायसिस एक सामान्य स्थिति है, इसमें त्वचा की सूजन, जलन होती है। यह विशेष रूप से त्वचा पर लाल, पपडीले धब्बे विकसित होते हैं। एक बार यह बीमारी लगने के बाद बार- बार आती है।

प्रयोग के तौर पर की थैरेपी, दिखने लगा असर

आरके अस्पताल में हॉल बॉडी नेरोबेल्ट मशीन फरवरी माह में लगाई गई। इसकी कीमत पांच लाख रुपए है। वहीं प्रयोग के तौर पर इसको फरवरी माह में शुरू कर दिया। वहीं एक सफेद दाग के मरीज को थैरेपी देना भी शुरू किया था। जो काफी कारगर साबित हुआ। थैरेपी की बदौलत उसके त्वचा के रंग में फिर से बदलवा होना शुरू हो गया। चर्म रोग विशेषज्ञ डाॅ. रोहित कटारिया ने बताया कि रोगी के शरीर में त्वचा संबंधित सेल निष्क्रिय हो जाते है। जिनको थैरेपी से सक्रिय किया जाता है। इनको लगातार थैरेपी मिलने के बाद ही यह सक्रिय होते है। इसका परिणाम करीब तीन माह बाद स्पष्ट तौर से दिखाई देने लगता है।

हॉल बॉडी नेरोबेल्ट मशीन

हॉल बॉडी नेरोबेल्ट मशीन ऐसे काम करती है

चर्म रोग विशेषज्ञ ने बताया कि यह मशीन एक अलमारी नुमा है। इस अलमारी में पराबैंगनी किरणें निकलेगी। जो मरीज के शरीर में प्रवेश करके मरीज के शरीर में निष्क्रिय सेल को सक्रिय करने का काम करेगी। मशीन में मरीज को खड़ा किया जाएगा। जो डोजी मीटर से डोज को दिन ब दिन बढ़ाया जाता है। एक निश्चित स्तर मरीज के अनुसार डोज को सेट कर दिया जाता है। लगातार तयशुदा डोज पर उसकी थैरेपी जारी रहती है। इस थैरेपी को नेरोबेल्ट फोटो थैरेपी कहा जाता है। जो मरीज को एक दिन छोड़कर एक दिन दी जाती है। वहीं मरीज की बीमारी के हिसाब से उसकी थैरेपी की जाती है।

थैरेपी का 20 रुपए चार्ज थैरेपी करवाने वाले मरीजों से एक बार का 20 रुपए शुल्क लिया जाएगा। यह थैरेपी एक दिन छोड़कर एक दिन करनी होती है। जो कि महीने में 15 दिन होगी। इसका चार्ज 300 रुपए होगा। जो कि मरीज के लिए बहुत ही कम शुल्क रखा गया।

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