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देवस्थान विभाग ने लगाई द्वारिकाधीश प्रतिमा मंदिर से बाहर ले जाने पर रोक, विट्‌ठल विलास में अगले माह नहीं हो पाएगा नाव मनोरथ

3 वर्ष पहले
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विट्ठल विलास बाग में अधिकमास के तहत 9 से 11 जून तक होने वाले नाव मनोरथ में भगवान द्वारिकाधीश के बाल स्वरूप को ले जाने पर देवस्थान विभाग ने रोक लगा दी है। विभाग की आयुक्त ने कलेक्टर और मंदिर अधिकारी को पत्र में प्रतिमा की सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। हालांकि मंदिर अधिकारी का कहना है कि उन्हें विभाग से ऐसा पत्र नहीं मिला है। नाव मनोरथ के लिए प्रतिमा को बाग में ले जाने के संबंध में गोस्वामी परागकुमार, गोस्वामी शिशिरकुमार ने विभाग को पत्र लिखा था। मंदिर ट्रस्ट के नियमों के अनुसार देवस्थान विभाग प्रतिमा को मंदिर से बाहर ले जाने पर रोक लगा सकता है। गोस्वामी पराग कुमार व गोस्वामी शिशिर कुमार की वकील वंदना उदावत ने 19 अप्रैल को देवस्थान आयुक्त को प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर प्रार्थना पत्र लिखा था। पत्र में बताया कि 2015 के अधिकमास में द्वारिकाधीश मंदिर के गर्भगृह में आग लग गई थी। पिछले साल आठ अक्टूबर को गर्भगृह में ही नकली प्रतिमा मिली थी। इस कारण उन्होंने द्वारिकाधीश प्रभु की मूल प्रतिमा को सुरक्षा, संरक्षा के लिहाज से सभी मनोरथ मंदिर परिसर में ही करवाने की मांग की थी। प्रतिमा को मंदिर परिसर से बाहर विट्‌ठल विलास जाने पर रोक लगाने, ठाकुरजी की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी कराने की मांग का प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर देवस्थान सहायक आयुक्त जतिन कुमार गांधी ने बुधवार को प्रतिमा विट्‌ठल विलास बाग में ले जाने पर रोक लगा दी है। गांधी ने नौ से ग्यारह जून तक होने वाले मनोरथ मंदिर परिसर में ही करवाने का आदेश दिया है।

कांकरोली धोइंदा राजनगर

अधिक मास शुरू : गोस्वामी भाइयों के बंटवारा विवाद पर कोर्ट आज दे सकती है फैसला

ब्रजभूषण लाल महाराज के निधन के बाद तीनों भाई ट्रस्टी बने थे

गोस्वामी पराग कुमार व गोस्वामी शिशिर कुमार के वकील वंदना उदावत ने बताया कि 1980 में पीठाधीश्वर ब्रजभूषण लाल जी महाराज के निधन के बाद देवस्थान विभाग के पंजीयन में प्रमाण पत्र गोस्वामी ब्रजेश कुमार के नाम पीठाधीश्वर के नाम नहीं है। पीठाधीश्वर ब्रजभूषण लाल महाराज के निधन के बाद अपर जिला न्यायालय विचाराधीन प्रकरण में उत्तराधिकारी के रूप में 1/1 ब्रजेश कुमार, 1/2 शिशिर कुमार व 1/3 पराग कुमार के नाम उत्तराधिकारी की हैसियत से संस्थित किए। तीनों के द्वारा वाद उठाया गया। इसके बाद देवस्थान सहायक आयुक्त ने 9 नवम्बर 1981 को उत्तराधिकारी मानते प्रन्यासी घोषित कर दिए। तीनों ही वंशानुगत ट्रस्टी है। देव स्थान ने सात ट्रस्टी बनाए। कार्य वाहक प्रन्यासी ब्रजेश कुमार गोस्वामी, पराग कुमार, शिशिर कुमार को ट्रस्टी नियुक्त किया था।

उदयपुर, गुरुवार 17 मई , 2018

भाइयों ने 26 से 13 तक के मनोरथ अपने करवाने का प्रस्ताव रखा था

मंदिर में अधिकमास मनोरथ की तीसरी सूची में पीठाधीश्वर ब्रजेश कुमार से अपने दोनों छोटे भाइयों के नाम जोड़ दिए। लेकिन मनोरथ नहीं जोड़ गए। दोनो छोटे भाई पराग कुमार व शिशिर कुमार 26 मई से 13 जून तक होने वाले मनोरथ चाहते है। तीसरी सूची में पीठाधीश्वर ने रंगीन सूची जारी काके पीले रंग के मनोरथ ब्रजेश कुमार महाराज के व गुलाबी रंग के मनोरथ पराग कुमार व शिशिर कुमार के रखे गए।

रेलमगरा खमनोर देलवाड़ा

प्रतिमा को बाहर ले जाना उचित नहीं होगा

अधिकमास में ठाकुरजी की प्रतिमा काे विट्‌ठल विलास बाग में ले जाना उचित नहीं होगा। इससे प्रतिमा की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। सुरक्षा में थोड़ी-सी चूक होने पर वैष्णवों की आस्था को ठेस पहुंच सकती है। नैमिषकुमार, गोस्वामी

मुझे अभी तक देवस्थान विभाग की ओर से प्रतिमा को विठ्ठल विलास बाग लेने पर रोक संबंधित कोई पत्र नहीं मिला है। हमने दस दिन पूर्व ही मनोरथ के लिए प्रतिमा को विठ्ठल विलास बाग लेने जाने के लिए देवस्थान विभाग को पत्र लिखा था। इसी स्वीकृति भी मिल गई है। देवस्थान विभाग के आयुक्त का पत्र मिलने के बाद ही आगे कुछ निर्णय किया जाएगा। भगवती लाल पालीवाल, मंदिर अधिकारी, द्वारिकाधीश मंदिर

देवस्थान विभाग से प्रतिमा बाहर ले जाने संबंधित कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। देवस्थान विभाग ने पत्र में क्या लिखा है, इसको पढ़ने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। वागीश कुमार, (गोस्वामी ब्रजेश कुमार के पुत्र)

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