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मस्ताबाद सनातन गोशाला में स्थापित होगी 31 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा

3 वर्ष पहले
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रामगढ़. प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व नगर भ्रमण के लिए बालाजी की प्रतिमा को ले जाते ग्रामीण।

22 अप्रैल काे हाेगी 51 बालाजी प्रतिमाअाें की स्थापना, रामगढ़ कस्बे में परिक्रमा प्रारंभ

भास्कर न्यूज | रामगढ़

संकटमोचन गाेबरिया हनुमान प्रतिमाओं का वैदिक रीति से अधिवास कराने के बाद बुधवार काे रामगढ़ कस्बे के धर्मप्रेमियाें ने बालाजी की सवारी निकाली। बैंड-बाजाें के साथ रथ में विराजित बालाजी सहित लक्ष्मी व गणेश जी की मूर्तियों काे मुख्य बाजाराें से हाेकर नगर भ्रमण कराया। इसके बाद अखंड जोत और भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में गुरुवार को सुंदरकांड और धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। बुधवार को हुए कार्यक्रमों के दौरान लाला सैनी, सरपंच देवेन्द्र दत्ता, पं. विष्णुदत्त शर्मा, जयराम मीणा, सुरेन्द्र सैनी, अमरसिंह ठाकर, नवल शर्मा, घुग्घी सैनी, दिनेश दत्ता, कजाेडी सैनी, सूर्य स्वरूप शर्मा, नरेश सैनी, मुकेश सैनी व गोविंद सैनी सहित काफी संख्या में महिलाएं भी मैजूद रहीं।

पं. विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि 51 गोबरिया बालाजी मंदिरों के लिए रामगढ़ क्षेत्र के चिन्हित गांवाें में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व मूर्तियों काे ले जाकर घर-घर धार्मिक अलख जगाने का कार्य किया जाएगा। नामांकित गांवों के धर्मप्रेमी ग्रामीण अपने-अपने गांवाें में 21 अप्रैल तक प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व मूर्तियाें काे भ्रमण करवाएंगे। अन्त में बैसाख शुक्ल सप्तमी रविवार 22 अप्रैल काे दाेपहर सवा बारह बजे सभी स्थानाें पर एक साथ गाेबरिया बालाजी महाराज की मूर्तियाें की स्थापना हाेगी।

मस्ताबाद में सबसे बड़ी बालाजी की प्रतिमा होगी

पं. विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि सनातन गोशाला मस्ताबाद के लिए शीघ्र ही गाय के गाेबर से 31 फीट ऊंची बालाजी की मूर्ति का निर्माण कराया जाकर प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। यह अलवर जिले में सबसे बडी बालाजी की प्रतिमा होगी। वहीं ततारपुर गोशाला से अाए गाे सेवकाें के द्वारा भी गाेबर से निर्मित सवा पांच फीट की मूर्ति स्थापित की जाएगी। शर्मा के अनुसार 22 अप्रैल काे स्थापित सभी मंदिराें के गर्भगृह में बालाजी के साथ लक्ष्मी व गणेशजी की मूर्तियां भी हाेंगी। वहीं मुख्य द्वार पर अलग से गणेश जी महाराज की मूर्ति स्थापित की जायेगी।

गोसंवर्धन प्रमुख उद्देश्य

भारतीय किसान संघ केन्द्रीय सह संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह व कृषि उपज मंडी अलवर सचिव पं. विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि गाय के गाेबर से मूर्तियाें का निर्माण करने के पीछे गाेवंश प्रेम काे जागृत करना ही उद्देश्य है। उन्हाेंने बताया कि पाैराणिक प्रमाण है कि प्रकृति के संतुलन काे बनाए रखने के लिए ही हिन्दू संस्कृति में वनस्पति से लेकर पशुअाें काे धर्म से जाेडा गया। ताकि इनकी रक्षा की जाकर प्रकृति व पर्यावरण के संतुलन काे सुरक्षित किया जा सके।

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