खालसा मेरो रूप है खास, खालसे में हौं करो निवास...
श्रीगुरुद्वारा साहिब में खालसा का 319 वां सृजन दिवस मनाया गया। शनिवार को साहिब दरबार में ग्रंथी ज्ञानी निरंजन सिंह व बाबा सुरजीत सिंह ने खालसा इतिहास को बताया। वहीं, हजूरी रागी जत्था भाई मोहकम सिंह ने खालसा सृजन पर गुरुवाणी गायन किया।
उन्होंने, खालसा मेरो रूप है खास, खालसे में हौं करो निवास.., वहि प्रगटिओ मरद अंगमड़ा बरियाम अकेला, वाह वाह गोविंद आपे गुरु चैला.., एैसा सत् गुर जे मिले.. व सो सति गुरु धन्न धन्न जिन मरमगड़ तोड़िया..गुरुवाणी गायन कर संगत को निहाल किया। जबकि, महिलाओं ने भी गुरुवाणी गायन पेश किया। यहां, महासचिव जगजीत सिंह सोनी ने कहा कि जाति, पात व ऊंच नीच के साथ समय की हुकूमत के हर प्रकार के जोर जुल्म से त्रस्त जनता कराह रही थी। वैसे समय तेगबहादुर की शहादत के बाद 24 वर्षों तक सिख पंथ को युद्ध, कला, तलवार बाजी, घुड़सवारी व विधाओं से मानव विकास में 1699 में खालसा रूपी क्रांतिकारी फौज का सृजन हुआ।
धार्मिक कार्यक्रम के बाद गुरु लंगर का प्रसाद बांटा गया। कार्यक्रम में प्रधान रमिंदर सिंह गांधी, इंदरपाल सिंह सैनी, परमिंदर सिंह जस्सल, डॉ नरेंद्र सिंह, रघुबीर सिंह सलूजा, दौलत सिंह सैनी, सुरेंद्र सिंह होरा, मनपाल सिंह सोनी, नरेंद्र सिंह गांधी, हरदीप सिंह होरा, मनजीत सिंह भूसरी, इंद्रजीत सिंह होरा, बलविंदर सिंह सोनी, लवली गांधी, सतपाल कौर सोनी, बलविंदर कौर छाबड़ा, सीमा कोहली, जसमीत कौर सोनी, नरेश कौर सोनी, डाॅ मनवीर कौर, जसविंदर कौर होरा, विक्की लांबा, निक्की लांबा, टि्वंकल छाबड़ा, महेंद्र कौर अरोड़ा, नीलम अरोड़ा, परमजीत कौर भूसरी, बलवीर कौर जस्सल, रानी जस्सल, विमला जस्सल सहित अनेक साध-संगत शामिल थे।
दरबार में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल महिलाएं और गुरुवाणी गायन करते रागी जत्था।