भ्रष्टाचार निरोध ब्यूरो (एसीबी) ने शनिवार को रामगढ़ थाने के हैडकांस्टेबल गंभीरसिंह जाट को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। हैडकांस्टेबल ने यह राशि मारपीट के एक मामले में 3 मुल्जिमों के नाम निकालने की एवज में ली थी। एसीबी की इस कार्रवाई से थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों में हड़कंप मच गया।
एसीबी के डीएसपी सलेह मोहम्मद ने बताया कि रामगढ़ के मुकंदवास निवासी इलियास पुत्र रुस्तम खान ने 15 मई को शिकायत दर्ज कराई कि पिछले दिनों उसके भाई हाशिम व उसके परिवार में झगड़ा हुआ था। इसमें दोनों पक्षों ने 3 मई को रामगढ़ थाने में मामला दर्ज कराया था। इस मामले की जांच हैडकांस्टेबल गंभीर सिंह कर रहा था। शिकायत में बताया कि जांच अधिकारी हैडकांस्टेबल गंभीर सिंह इलियास से 5 में से 3 मुल्जिमों को केस से बाहर निकालने के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। एसीबी ने इस शिकायत की जांच की। इसमें हैडकांस्टेबल गंभीर सिंह की ओर से 10 हजार रुपए रिश्वत मांगना प्रमाणित हो गया। डीएसपी ने बताया कि शनिवार को सीआई महेंद्र मीणा के नेतृत्व में आरोपी हैडकांस्टेबल के खिलाफ ट्रेप की कार्रवाई के लिए विशेष टीम बनाई गई। एसीबी टीम ने रामगढ़ पहुंचकर इलियास को केमिकल पाउडर लगे 10 हजार रुपए के नोट देकर शाम 3.20 बजे हैडकांस्टेबल गंभीर सिंह को देने भेजा। इस दौरान इलियास को हैडकांस्टेबल गंभीरसिंह थाने के अंदर स्थित एक कमरे में ले गया। यहां हैडकांस्टेबल ने इलियास को इशारा कर रिश्वत की राशि 10 हजार रुपए टेबल पर रखवा ली। इस बीच, एसीबी टीम ने कमरे में दबिश देकर हैडकांस्टेबल को पकड़ लिया और रिश्वत की राशि बरामद कर ली। साथ ही मुकदमे की फाइल जब्त कर ली।
एसीबी की कार्रवाई के दौरान थाने में ही था थानाधिकारी : एसीबी की कार्रवाई के दौरान थानाधिकारी नवल किशोर मीणा अपने ऑफिस में बैठा हुआ था। मगर, उन्हें भी एसीबी की कार्रवाई की भनक नहीं लगी। आरोपी हैडकांस्टेबल गंभीर सिंह पुत्र रामस्वरूप जाट निवासी जटवाड़ा थाना खेरली करीब 11 माह से रामगढ़ थाने में हैडकांस्टेबल के पद पर कार्यरत है।
आरोपी गंभीरसिंह
इलियास पढ़ा लिखा नहीं, साढू के बेटे से ली मदद
इलियास और उसके परिवार के खिलाफ झगड़े का मामला दर्ज हुआ। इलियास कम पढ़ा लिखा था। जब वह मामले की जांच के लिए हैडकांस्टेबल गंभीर सिंह से मिला तो उसने उसे पुलिस का रौब दिखाया। साथ ही मुकदमे में से 3 जनों के नाम हटाने के एवज में उससे 10 हजार रुपए मांगे। हैडकांस्टेबल उस पर लगातार गिरफ्तारी का दबाव बना रहा था। इस पर इलियास ने अपने साढू के बेटे मुश्ताक से मदद लेकर एसीबी कार्यालय अलवर पहुंचकर शिकायत की। इससे हैडकांस्टेबल पकड़ा जा सका।