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रामपुर में उत्तर भारत का पहला हाईटेक आयुर्वेद अस्पताल भवन बनकर तैयार

3 वर्ष पहले
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हिमाचल के रामपुर में पूरी सुविधाओं से लैस आधुनिक आयुर्वेद भवन बनकर तैयार हो गया है। अब प्रदेश के लोगों को पंचकर्मा के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध केरल नही जाना होगा। इस अस्पताल में पंचकर्मा सहित क्षारसूत्र की सुविधाएं मिलेगी। अभी तक प्रदेश में इस तरह का आधुनिक सुविधाओं से लेस होने वाला आयुर्वेद अस्पताल नहीं है। इस अस्पताल को विशेष तौर से पंचकर्मा व क्षारसूत्र के लिए डिजाइन किया गया है। उप निदेशक कांशीराम मोक्टा ने कहा कि अब ये भवन तैयार है जल्द ही यहां पर सभी मशीनें व आवश्यक सामान भेजा जाएगा। यह अपनी तरह का ये पहला आयुर्वेद अस्पताल होगा। जिसमें आधुनिक मशीनों सहित विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम मौजूद रहेगी।

उप निदेशक की अगवाई में पहुंची टीम : इस भवन के अंतिम कार्य को जांचने के लिए आयुर्वेद विभाग की टीम उप निदेशक की अगवाई में मौके पर पहुंची। इस टीम में उप निदेशक डाॅ. कांशीराम मोक्टा, उपमंडलीय आयुर्वेद अधिकारी डाॅ. देवप्रकाश, जिला किन्नौर आयुर्वेद अधिकारी डाॅ. राजेंद्र शर्मा, डाॅ. सचिन मौजूद रहे। टीम ने कहा कि भवन पूरी तरह से डिजाइन के मुताबिक बना है। साथ ही अस्पताल में हर सुविधाओं को ख्याल रखा गया है। क्षारसूत्र और पंचकर्मा के लिए जिस तरह के कमरों का आवश्यकता होती है उसे उसी तरह से तैयार किया गया है।

रामपुर में बने आयुर्वेद भवन का निरीक्षण करती आयुर्वेद विभाग की टीम

केरल पद्धति पर ही बन रहा है पंचकर्मा वार्ड

इस अस्पताल में पंचकर्मा के लिए जो वार्ड बनाया गया है उसे केरल की पद्धति को फॉलो कर बनाया जा रहा है। यानि केरल में पंचकर्मा के लिए जो सुविधाएं और एरिया होना चाहिए उसे इस वार्ड में रखा गया है। एक फ्लोर में एक तरफ महिलाओं और दूसरी तरफ पुरूषों के लिए वार्ड बनाए गए है। आयुर्वेद विभाग का कहा कि जून माह में इस अस्पताल का उद्घाटन हो जाएगा। जिसके बाद एक छत के नीचे पंचकर्मा सहित क्षारसूत्र व अन्य सुविधाएं मिलेगी। इस अस्पताल का भवन तैयार होने से सबसे अहम बात पंचकर्मा का शुरू करना है। इन अस्पताल के भवन को पंचकर्मा के लिए ही डिजाईन किया गया है। यानि अब प्रदेश के लोगों को केरल जाने की जरूरत नहीं।

जून माह में इस अस्पताल के भवन को तैयार करने का लक्ष्य है। जिसके बाद यहां पर पंचकर्मा और क्षारसूत्र जेसी सुविधाएं मिल पाएगी। डाॅ. कांशीराम मोक्टा, उप निदेशक, आयुर्वेद विभाग, जिला शिमला

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