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खेत गिरवी रखा, अाय का कोई स्त्रोत नहीं, पीएम आवास मिलने तक मांगलिक भवन में रहेगी वृद्धा

3 वर्ष पहले
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दो छोटे बच्चों के पिता की बीमारी से मौत हो गई, मां उन्हें बेसहारा छोड़कर दूसरी जगह चली गई। अब इन बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी वृद्ध दादी उठा रही है। अनाथ बच्चों के भरण पोषण के लिए कोई रिश्तेदार राजी ना हुआ। हिस्से में मिली पैतृक जमीन इलाज के चलते गिरवी रखना पड़ी। दर-दर भटकते बच्चों का सहारा बनी उनकी दादी काली। जब तक पीएम आवास नहीं मिलेगा तब तक वह मांगलिक भवन में रहेगी।

हम बात कर रहे हैं ग्राम बड़ा मातासुला के कल्लू फलिया में रहने वाली 65 वर्षीय कालीबाई नाना वसुनिया की। उसके 3 पुत्र में से 2 की मौत हो गई है। मझले पुत्र जामसिंह सीमेंट फैक्ट्री में काम करता था। उस दौरान उसे बीमारी ने जकड़ लिया। 2 वर्ष पूर्व उसकी मौत हो गई। जामसिंह के दो बच्चे 5 वर्षीय संजय व 4 वर्षीय पुत्री सन्नू थे। जामसिंह की मौत के बाद उसकी प|ी इन बच्चों को छोड़कर चली गई। बच्चों को पाल पोसकर बड़ा करने की जिम्मेदारी उसने अपने कंधों पर ले ली। खेत गिरवी था। आय का कोई स्रोत नहीं था। ऐसे में काली इन्हें लेकर मजदूरी करने गुजरात चली गई। पिछले 2 वर्षों में वह घर कुछ दिनों के लिए ही आती रही। इस दौरान कच्चा मकान भी ढह गया। 4-5 दिन पूर्व लौटी तो सिर छुपाने की जगह भी नहीं थी। ऐसे में उसने बड़े बेटे के मकान के पीछे ही खुले में डेरा जमाया।

कालीबाई को मिलेगा पीएम आवास में पक्का मकान

कालीबाई वसुिनया को शासन की किसी योजना का लाभ नहीं मिला है, ना तो उसे पेंशन मिलती है न ही खाद्यान्न पर्ची। यह जानकारी उसने नगर के किराना व्यवसायी प्रकाश अग्रवाल को लगी। उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष मनोहर सेठिया के पुत्र संदेश सेठिया से काली को मिलवाया। संदेश ने पंचायत सचिव विक्रम अखाड़िया से संपर्क कर काली के बारे में बताया। अखाड़िया ने तत्परता दिखाते हुए काली से संपर्क किया। दोनों बच्चों के आधारकार्ड बनने को दिए गए। बैंक खाता खुलवाया गया। रविवार को हुई विशेष ग्राम सभा में काली के पीएम आवास के लिए आवेदन सूचीबद्ध किया गया। जब तक आवास की व्यवस्था न हो उसके रहने के लिए मांगलिक भवन का एक कमरा दिया गया। उसके व दोनों बच्चों के एक समय की भोजन की व्यवस्था आंगनवाड़ी केंद्र पर की जाने की स्वीकृति दी गई। खाद्यान्न पर्ची की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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