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यात्रियों को संक्रमण से बचाने को रेलवे ने 60 % ट्रेनों में लगाया बायो टॉयलेट, 400 कोच में लगाने का लक्ष्य

3 वर्ष पहले
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डीबी स्टार | रांची/जमशेदपुर

देशभर के ट्रेनों के शौचालय के उपयोग से हर दिन 4 हजार मीट्रिक टन मानव अपशिष्ट जमीन पर गिरता था। गंदगी के कारण जहां पर्यावरण प्रदूषित होता है। वहीं लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इससे निजात दिलाने के लिए भारतीय रेल ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत बायो टायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इससे काफी हद तक सुधार हुआ है। रेलवे द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार 60 प्रतिशत मानव अपशिष्ट को जमीन पर गिरने से रोक लिया गया है। ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगने से ऐसा संभव हुआ है। देश भर में चलने वाली ट्रेनों के 60 प्रतिशत डिब्बों में बायो टाॅयलेट का इस्तेमाल है।

यात्री निशुल्क पे एंड यूज टॉयलेट का करेंगे उपयोग, पांच साल के लिए था 62 लाख रुपए का कांट्रैक्ट
रांची स्टेशन पर अवैध वसूली की ज्यादा शिकायतें मिलने पर एजेंसी का टेंडर रद्द
सिटी रिपोर्टर | रांची

रांची रेलवे स्टेशन के पे एंड यूज टॉयलेट में यात्रियों से अवैध वसूली हो रही थी। रेलवे के फाइन व चेतावनी के बाद भी एजेंसी नहीं सुधरी, तो शुक्रवार की रात 12 बजे से कांट्रैक्ट रद्द कर एजेंसी को हटाने का आदेश दिया गया। शुक्रवार से रांची स्टेशन पर पुरुष व महिला वेटिंग हॉल के अलावा पार्सल के पास शौचालय नि:शुल्क कर दिया गया है। सीनियर डीसीएम एमआर आचार्या ने पे एंड यूज टॉयलेट के पास नोटिस भी लगाने का आदेश दिया है। नवयुवक संघ श्रमिक स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड पे एंड यूज टॉयलेट का काम कर रही थी। पांच साल का कांट्रैक्ट 62 लाख रुपए का था। दो साल से यह एजेंसी कार्य कर रही थी। एजेंसी द्वारा बराबर यात्रियों से ठहरने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही थी। इस एजेंसी के खिलाफ 45 से ज्यादा यात्रियों की शिकायत आई। कई बार समझाया गया।

भारतीय रेल ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत बायो टायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया
मेड इन इंडिया है बायो टॉयलेट : बायो शौचालय की प्रौद्योगिकी का अविष्कार और डिजाइन मेड इन इंडिया है। इसे भारतीय रेलवे के इंजीनियरों और डीआरडीओ वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह एक उदाहरण है जिसमें रक्षा इस्‍तेमाल के लिए विकसित प्रौद्योगिकी नागरिक कार्यों के लिए इस्‍तेमाल की जा रही है।

तत्कालीन सीनियर डीसीएम ने आधी रात को की थी छापेमारी
तत्कालीन एसडीसीएम ने की रात में छापेमारी
तत्कालीन सीनियर डीसीएम नीरज कुमार ने 4 माह पहले आधी रात को तौलिया ओढ़कर छापेमारी की थी। इस दौरान वे यात्री बनकर वेटिंग हॉल में बैठे और यात्रियों से वसूले जा रहे पैसे को कैमरे में कैद किया। एजेंसी के संचालक ने सीनियर डीसीएम से भी पैसा मांगा था, तभी उन्होंने आरपीएफ को बुलाया और अरेस्ट कराया था। इस दौरान सीनियर डीसीएम ने 30 हजार रुपए फाइन की थी।

15 से ज्यादा शिकायतें आईं थी
एजेंसी के खिलाफ 15 से ज्यादा शिकायतें सीनियर डीसीएम के पास आई थी। हाल में डीआरएम विजय कुमार गुप्ता व एडीआरएम विजय कुमार ने रांची रेलवे स्टेशन का इंस्पेक्शन किया था। यात्रियों ने शिकायत की थी कि पे एंड यूज टॉयलेट संचालक वेटिंग हॉल में ठहरने का पैसा हेता है। उसी समय डीआरएम ने कड़ी कार्रवाई की बात कही थी।

वेटिंग हॉल में ठहरने के नाम पर होती थी वसूली

रात में यात्री अक्सर रांची रेलवे स्टेशन के वेटिंग हॉल में ठहरते हैं। ऐसे यात्रियों से एजेंसी अवैध वसूली करती थी। रातभर का 30 से 50 रुपए लिए जाते थे। हर दिन 40 से 50 यात्री ठहरते हैं।

1.25 लाख डिब्बों में लगा बायो टॉयलेट
भारतीय रेलवे ने मार्च, 2018 तक ट्रेन डिब्बों में करीब 1,25,000 बायो शौचालय लगाए हैं। यह भारतीय रेलवे के कोच के बेड़े का करीब 60 प्रतिशत है। वर्ष 2017-18 के दौरान भारतीय रेलवे ने डिब्बों में सबसे अधिक बायो शौचालय स्थापित किए जो 40,000 बायो शौचालय स्थापित करने के लक्ष्य से 40 प्रतिशत और 2016-17 में 34134 जैव शौचालय बनाने के निर्धारित लक्ष्य से 64 प्रतिशत अधिक है। मालूम हो कि इसकी शुरूआत ग्‍वालियर-वाराणसी बुंदेलखंड एक्‍सप्रेस में जनवरी 2011 को 57 बायो शौचालयों से हुई थी। वर्तमान में भारतीय रेलवे ने 27 सेक्शनों पर ग्रीन कॉरिडोर के रूप में परिचालन शुरू किया है। इन सेक्शनों पर चलने वाली सभी ट्रेनों में बायो शौचालय लगे हैं। देशभर के साथ ट्रेन के कोच लगाने में दक्षिण पूर्व रेलवे जाेन ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2017-18 के लिए जोन को 400 कोच में बायो टायलेट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन जोन ने लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए 473 कोच में बायो टायलेट स्थापित कर दिया है। आने वाले वर्ष में अन्य ट्रेनों में भी बायो टायलेट लगाया जाना है।

यात्री से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा
एजेंसी की काफी शिकायतें मिली हैं। चेतावनी के बाद भी नहीं सुधारी, इसलिए कांट्रैक्ट रद्द किया। यात्री से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

एमआर आचार्या, एसडीसीएम, रांची मंडल

आरजीटीए ने कहा- डीजल की कीमत को नियंत्रित करे सरकार
सिटी रिपोर्टर | रांची

आरजीटीए की कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को किशोरगंज कार्यालय में हुई। इसमें डीजल के मूल्यों में लगातार वृद्धि होने से परिवहन व्यवसाय के प्रभावित होने पर चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि लागत मूल्य बढ़ने से व्यवसायिक वाहनों के भाड़े में वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। डीजल के दाम हर दिन बढ़ने से परिवहन व्यवसायी परेशान हैं। केंद्र सरकार डीजल के दाम पर नियंत्रण लगाए। व्यवसायिक चालकों ने राज्य में लाइसेंस नहीं बनने पर नाराजगी जताई है। इसी तरह राज्य में सिर्फ 5 मोटरयान निरीक्षक हैं। जबकि, हर जिले में मोटरयान निरीक्षक होना चाहिए। राजधानी में न ही ट्रांसपोर्ट नगर है और न वाहन पड़ाव की व्यवस्था है। प्रशासन ने 15 घंटे से अधिक समयावधि के लिए व्यवसायिक वाहनों के परिचालन पर रोक लगा रखी है। बेवजह जुर्माना वसूल कर परिवहन व्यवसायियों को तंग किया जाता है। कई के अग्रिम टैक्स देने वाले व्यवसायियों की तरफ ध्यान किसी का नहीं है।

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