श्रीमद भागवत गीता धर्मशास्त्र ही नहीं, संपूर्ण मनोविज्ञान है
चिन्मय मिशन आश्रम के आचार्य स्वामी माधवानंद जी ने कहा- श्रीमद भागवत गीता एक धर्मशास्त्र ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मनोविज्ञान है। इसमें मानवीय जीवन का मार्ग प्रशस्त है। मनुष्य के जीवन में आनेवाली हर समस्या का निदान श्लोकों में वर्णित है। वे बुधवार को श्रीश्री मां आनंदयमयी आश्रम मेन रोड में श्रीमद् भागवत गीता पर पांच दिवसीय प्रवचन के चौथे दिन बोल रहे थे। स्वामी ने गीता के प्रथम अध्याय के 28 श्लोकों से लेकर 47वें श्लोक तक में अर्जुन की मन:स्थिति का वर्णन किया। बताया कि अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि युद्ध के मैदान में उनके रथ को ऐसे स्थान पर रखा जाए, जहां से वे दोनों समूह की सेनाओं को देख सकें। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें वैसे ही स्थान पर ले गए। वहां से दोनों ओर की सैन्य शक्ति के रूप में अपने बंधु-बांधव को ही देखा। इस दर्शन के बाद अर्जुन के मन में करुणा जाग उठी। यह करुणा आशक्ति, मोह, माया वाली थी। अर्जुन ने महसूस किया कि उनके अंग शिथिल हो रहे हैं। प्यास के कारण मुंह सूखने लगे। शरीर में अलग कंपन होने लगा।
आनंदमयी आश्रम में आचार्य स्वामी माधवानंद से भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।
मां-पिता की सेवा में तन का करें सदुपयोग : सुमन केशरी
रांची | आचार्य सुमन किशोरी ने कहा है कि मानव तन मिला है तो इस तन का सदुपयोग करें। मानव सेवा करें। माता-पिता की सेवा करें। दीन-दुखियों की मदद करें। आचार्य केशरी बुधवार को नगड़ी में चल रहे सात दिवसीय श्रीमदभागवत ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान के चरणों में कुछ समय अवश्य ही बिताना चाहिए। अपने आपको सरल बनाएं और सदा सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलें। ऐसा करने पर हमेशा आपको ईश्वर का साथ मिलता रहेगा। मौके पर अतिथि के रूप में सांसद रामटहल चौधरी और पूर्व मंत्री रामजीलाल शारदा उपस्थित थे। उन्हें समिति की ओर से श्रीकृष्ण पटिका देकर सम्मानित किया गया।
नगड़ी में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का 5वां दिन