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मैथन, पंचेत, तेनुघाट, पतरातू डैम समेत बड़े जलाशयों में लगेंगे सोलर पावर प्लांट
मुख्यमंत्री ने कहा एसईसीआई को सूचना भेजें,अधिकारी जल्द ही भ्रमण करेंगे
पॉलिटिकल रिपोर्टर | रांची
अब राज्य के डैम और बड़े जलाशयों में सोलर पावर प्लांट लगेगा। पहले चरण में मैथन, पंचेत, तेनुघाट तथा पतरातू डैम में प्लांट लगाया जाएगा। यह फ्लोटिंग सोलर पीवी (फोटो वॉयलेक) प्लांट होगा। इस बाबत मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नेशनल सोलर मिशन के अंतर्गत राज्य के बड़े जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर पीवी प्लांट लगाने का निर्देश दिया है। ऊर्जा विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव भेजा था। इस पर मंगलवार को मंजूरी देते हुए सीएम ने कहा है कि आगे की कार्रवाई के लिए सोलर इनर्जी ऑफ इंडिया लि.(एसईसीआई) को अधिकारी सूचना भेजें। एसईसीआई के अधिकारी जल्द ही राज्य का भ्रमण कर इस योजना को कार्यान्वित करने की दिशा में कार्रवाई करेंगे।
अब बोर्ड के अफसरों को भी रखना होगा सेफ्टी का ध्यान
मुख्यमंत्री ने भारत सरकार केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण भारतीय अधिनियम 2003 की धारा 177 (2) (बी) मैस्यूर रिलेटिंग टू सेफ्टी एवं इलेक्ट्रिकल सप्लाई रेगुलेशन 2010 को अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। इसके अधिसूचित हो जाने के बाद अब बिजली इंसपेक्टर और लाइसेंस बोर्ड के अफसर भी सेफ्टी के दायरे में आ जाएंगे। जिन्हें भी लाइसेंस दिया जाएगा उसमें सेफ्टी के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। बिजली इंसपेक्टर जब बड़े औद्योगिक इकाईयों, स्माल स्कैल इंडस्ट्रीज सहित अन्य बड़े बल्क उपभोक्ताओं के यहां निरीक्षण करेंगे तो उन्हें इस बात का ख्याल रखना होगा कि सेफ्टी मेरजमेंट पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है या नहीं।
13 नक्सली समेत 18 सजायाफ्ता जाएंगे हजारीबाग ओपन जेल
सीएम ने गृह विभाग के उस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है जिसके तहत हजारीबाग के खुला जेल सह पुनर्वास कैम्प में 18 सजायाफ्ता बंदियों को रखा जाएगा। इनमें केन्द्रीय कारा होटवार रांची के 10, केन्द्रीय कारा घाघीडीह जमशेदपुर के 5 और केन्द्रीय कारा दुमका के तीन बंदी होंगे। इसके अलावा आत्मसमर्पण करने वाले 13 नक्सलियों को भी हजारीबाग ओपन जेल में रखने पर सीएम ने स्वीकृति दी है। इनमें केन्द्रीय कारा पलामू के 3 तथा उपकारा खूंटी के 10 नक्सली हैं। सभी बंदियों को हजारीबाग के खुला जेल सह पुनर्वास कैम्प में स्थानांतरित किया जाएगा। प्रस्ताव में कहा गया था कि सुरक्षा की दृष्टि से इनको वहां भेजना जरूरी है।
जमीन की समस्या नहीं होगी, खेती योग्य भूमि बचेगी
झारखंड में जमीन की समस्या को देखते हुए अब बड़े जलाशयों में इस प्लांट को लगाने का निर्णय लिया गया है। इससे जमीन की समस्या के कारण आने वाली बाधा दूर होगी। कृषि योग्य जमीन भी खराब नहीं होगी। अधिकतम 100 से 200 किलोवाट ही बिजली उत्पादन ही इसकी क्षमता होगी। केरल में भी अब तक 200 किलोवाट तक ही क्षमता का यह फ्लोटिंग प्लांट लगाया जा सकता है। अभी झारखंड में इसकी शुरूआत की जा रही है। अगर यह पूरी तरह से सफल रहा तो इसे और जलाशयों में बढ़ाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ऊर्जा के लिए सोलर प्लांट पर जोर दे रही है। कई सरकारी भवन सोलर ऊर्जा से रोशन हो रही है।