एसीबी ने अवैध तरीके से जेल भेजा, सेवा नियमित हो: डॉ नाग
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर दायर केस और चार्जशीट को हाईकोर्ट की ओर से रद्द किए जाने के बाद भी गिरफ्तार किए गए रिनपास के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक नाग ने जेल अवधि में बिताए दिनों का कार्यरत अवधि मानकर सेवा नियमित करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने कहा है कि एसीबी की ओर से अवैध तरीके से गिरफ्तार किया गया। वे करीब 42 दिनों तक जेल में रहे। जेल से छूटने के बाद 09 अप्रैल को उन्होंने रिनपास में योगदान दिया। ऐसे में सभी 42 दिनों को कार्यअवधि माना जाए और उनकी सेवा रेग्युलर की जाए।
डॉ. अशोक नाग ने यह लिखा: डॉ. नाग ने लिखा है कि एसीबी की ओर से उनके खिलाफ वाद संख्या 62/16 दर्ज किया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2017 को निरस्त कर दिया गया। इसके अनुसार एसीबी की ओर से दर्ज एफआईआर, चार्ज शीट एवं समस्त जांच को भी निरस्त कर दिया गया है। इसके बावजूद एसीबी की ओर से अवैध तरीके से 23 फरवरी 2018 को शाम छह बजे गिरफ्तार किया गया। उन्हें 24 फरवरी से लेकर 7 अप्रैल तक बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में रहना पड़ा। सात अप्रैल को एसीबी न्यायालय द्वारा केस को समाप्त कर जेल से मुक्त कर दिया गया। उसके बाद 9 अप्रैल को रिनपास में योगदान दिया। ऐसे में 24 फरवरी से 07 अप्रैल तक की अवैध कारावास अवधि को कार्य अवधि के रूप में नियमित करें।
श्मशान घाट से किया था गिरफ्तार
हाइकोर्ट ने मामले के आरोपी पूर्व स्वास्थ्य सचिव बीके त्रिपाठी व अन्य की ओर से दायर क्रिमिनल याचिका पर सुनवाई करते हुए 19 दिसंबर 2017 को केस को निरस्त कर दिया था। हालांकि इसके बाद भी एसीबी के अधिकारियों ने रिनपास के पूर्व प्रभारी निदेशक सह चिकित्सा अधीक्षक डॉ अशोक कुमार नाग को 23 फरवरी को श्मशान घाट से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। डॉ अमूल रंजन के रिनपास परिसर स्थित आवास में 13 मार्च को इश्तेहार चिपका दिय। उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया था। अब अदालत ने शुक्रवार को डॉ अमूल रंजन की ओर से दायर क्वैशिंग याचिका को निष्पादित कर दिया। साथ ही इस मामले में नये सिरे से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए एसीबी को छूट प्रदान की।