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नियमों की अनदेखी करना महंगा पड़ा सरकार और ज्रेडा को, खारिज हुई बिजली खरीद पिटीशन
नियमों की अनेदखी करना अंतत: राज्य सरकार और ज्रेडा को भारी पड़ गया । यही कारण रहा है कि आयोग ने ज्रेडा के द्वारा बिजली खरीद पिटीशन को खारिज कर दिया। अब सरकार और ज्रेडा पुन: नया प्रस्ताव तैयार करने की तैयारी में जुट गया है। जानकारी के अनुसार जल्द ही नया खरीदी पिटीशन दायर किया जा सकता है। मगर इस मामले में अंतिम निर्णय सरकार को ही करना है। ज्रेडा एक माध्यम भर ही होगा।
ज्रेडा ने स्पष्ट कर दिया है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 63 के अनुरूप नहीं है। इस धारा में दर निर्धारित करने के लिए टेंडर या स्वच्छ प्रक्रिया अपनाये जाने का प्रावधान है। जिसे आयोग ने स्पष्ट किया है कि टैरिफ दर निर्धारण की प्रक्रिया स्वच्छ और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 63 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ज्रेडा ने केंद्र सरकार की अनुमति के बाद बिडिंग के लिए अपना नियम बनाया था। आयोग ने कहा है ज्रेडा ने मामले में कोई ऐसा साक्ष्य या तर्क प्रस्तुत नहीं कर सका है जिससे यह प्रमाणित हो कि उसने केंद्र सरकार से अपने लिए बिडिंग प्रोसेस बनाने की अनुमति नहीं ली थी।
इन कपंनियों ने लिया था हिस्सा : चयनित कंपनियों में बड़ोदरा की माधव इंरा प्रोजेक्ट लिमिटेड, हैदराबाद की कार्वी सोलर, गुड़गांव का रिन्यू सोलर पॉवर, चेन्नई की ओपीजी पॉवर जेनरेशन, पुणे का सुजियोन एनर्जी लिमिटेड और अहमदाबाद की अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड शामिल थीं।
जेड्रा के निदेशक निरंजन कुमार ने कहा कि हर पहलुओं का ध्यान में रखकर टैरिफ फाइल किया गया था। अभी मैं राज्य से बाहर हूं, ऑर्डर की पूरी कॉपी का अध्ययन करने के बाद ही इस संबंध में कुछ बोला जा सकता है। वैसे इस संबंध में अब अंतिम रूप से निर्णय सरकार को लेना है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही नया प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
अंतिम रूप से निर्णय सरकार को लेना है: निरंजन कुमार