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कोल इंडिया में नया प्राइसिंग सिस्टम जल्द होगा शुरू

3 वर्ष पहले
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कोल इंडिया प्रबंधन ने अपने कस्टमर्स को पारदर्शी अंदाज में अधिक फायदा पहुंचाने को लेकर योजना बनाई है। प्रबंधन कोयले के लिए नया प्राइसिंग सिस्टम शुरू करने जा रहा है। इसके लिए अहर्ताएं तैयार कर ली गईं हैं। कोल मुख्यालय की ओर से बताया गया कि नया प्राइसिंग सिस्टम, कस्टमर्स के लिहाज से बेहतर होने के साथ ही ट्रांसपैरेंट और ग्लोबल ट्रेंड्स के अनुसार होगा। जानकारी के अनुसार, कंपनी ने नए सिस्टम के बारे में जानकारी देने के लिए पावर और नॉन-पावर सेक्टर की कंपनियों की मीटिंग बुलाई है। यह मीटिंग इसी माह के अंत में होगी।

ऐसे संचालित होगा यह सिस्टम: नए सिस्टम के तहत प्राइसेज को नोटिफाई किया जाएगा। इससे कस्टमर्स को फायदा होगा और कंपनी एक इंटरनेशनल प्राइसिंग सिस्टम पर शिफ्ट हो जाएगी। नए सिस्टम में प्राइसेज बेचे जाने वाले कोयले की लिए एनर्जी की प्रति यूनिट के पैसे के आधार पर तय होंगे। इसके साथ ही प्रति किलोग्राम में कुल एनर्जी कंटेंट पर आधारित सिस्टम भी बरकरार रहेगा। प्रत्येक कंसाइनमेंट का प्राइस उस विशेष ग्रेड के कोयले के लिए एनर्जी की प्रति यूनिट के लिए तय रेट और एक किलोग्राम कोयले में मौजूद कुल एनर्जी के जरिए तय होगा। मौजूदा सिस्टम में एनर्जी कंटेंट की एक रेंज के लिए प्राइस समान होता है।

एनर्जी कंटेंट को ग्रेड के तौर पर कैटेगरी में रखा जाता है। कोल इंडिया ने नए सिस्टम के तहत ग्रेड की संख्या 17 से घटाकर 10 कर दिया है। कोल इंडिया नए सिस्टम में कोयले की टेस्टिंग का इंतजाम कर रहा है। इसमें पावर व नॉन पावर उपभोक्ताओं से फिडबैक भी लिया जाएगा

कोयला बेचने में प्रतिस्पर्धा बढ़ना ही कारण : महतो

एटक के राष्ट्रीय महामंत्री लखनलाल महतो कहते हैं कि कोल इंडिया कॉमर्शियल माइनिंग के तहत निजीकरण के लिए प्रयासरत है। विश्व स्तर पर कोयला बेचने में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। इसलिए, अपने कस्टमर्स को लुभाने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। इससे कस्टमर्स में कोल इंडिया के प्रति विश्वास मजबूत होगा।

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