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गीता में है जीवन की समस्याओं का समाधान : स्वामी माधवानंद

3 वर्ष पहले
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मनुष्य का जीवन ईश्वर का वरदान है, इसलिए इस जीवन की खुशियों, मुसीबतों और चुनौतियों को ईश्वरीय वरदान के रूप में सहर्ष स्वीकार करें। यह उद्गार चिन्मय मिशन के आचार्य स्वामी माधवानंद जी के हैं। वे रविवार की संध्या आनंदमयी आश्रम मेन रोड में 15-19 अप्रैल तक आयोजित पांच दिवसीय श्रीमद््भागवत कथा के प्रवचन में कही। उन्होंने भागवत गीता के वचनों पर गौर करने और जीवन में आत्मसात करने पर जोर देते हुए कहा कि यदि जीवन समस्या है, तो गीता के वचनों में जीवन की हर समस्या का समाधान है।

कार्यक्रम के पहले दिन उन्होंने प्रथम अध्याय अर्जुन विषाद योग पर विस्तृत प्रकाश डाला। कहा कि अर्जुन ने कुरुक्षेत्र में सैन्य बल को देख युद्ध न करने का निश्चय किया, क्योंकि वे संपूर्ण रूप से मोहित हो गए थे। स्वामी माधवानंद ने बताया कि इस अध्याय में अर्जुन के शोक, दु:ख और मोह का वर्णन है। यहां अर्जुन हर मानव का प्रतिनिधित्व करता है। हर मनुष्य के अंदर सुख और दुख दोनों हैं। लेकिन वह दु:ख से ज्यादा शोकित और जर्जर है। मनुष्य के दुख और विषाद का कारण अज्ञानता या सीमित ज्ञान है। स्वामी माधवानंद ने कहा कि सुख और दुख जीवन रूपी नदी के दो किनारे हैं। अपने दुखों के कारणों पर गौर करें और उन्हें दूर करें, तो निश्चित है कि जीवन में दु:ख या समस्याएं कम होंगी।

भागवत कथा सुनाते स्वामी माधवानंद।

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