प्रेग्नेंसी के पहले 3 माह में ही अल्ट्रासाउंड जरूरी
सम्मेलन में देश के करीब 250 स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हुए।
हेल्थ रिपोर्टर | रांची
ऑब्स एंड गायनाकोलॉजिकल सोसाइटी रांची चैप्टर (रॉग्स) का 17वां वार्षिक सम्मेलन रविवार को हुआ। कॉन्फ्रेंस की थीम प्रैक्टिकल ऑब्सटेट्रिक था, जिसमें मातृत्व स्वास्थ्य और प्रसव से संबंधित जटिलताओं पर चर्चा हुई। सोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रताप कुमार ने कहा कि गर्भ रुकने के 8 सप्ताह तक अल्ट्रासाउंड काफी जानकारी देता है। अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के शुरुआती दौर में ही करवाना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, कई महिलाएं गर्भावस्था के शुरुआती 3 माह यानी फ़र्स्ट ट्राइमेस्टर को बेहद हलके में लेती हैं। जबकि, यह समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान गर्भ में भ्रूण का विकास शुरू होता है। शरीर कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। खाने के टेस्ट और स्किन में भी बदलाव आने लगते हैं। कॉन्फ्रेंस को डॉ. प्रताप नारायणा, डॉ. केवी मालिनी, डॉ. अल्पेश, डॉ. करुणा और डॉ. आभा रानी सिन्हा ने भी संबोधित किया। मौके पर सचिव मधुलिका होरो, समरीना आलम आदि मौजूद थे।
1000 गर्भवती में से 200 की मौत प्रसव के दौरान
आयोजन समिति की अध्यक्ष रेणुका सिन्हा ने कहा कि विकासशील देशों में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। हमारा उद्देश्य है कि गर्भवती मां के स्वास्थ में सुधार हो। डिलेवरी अच्छे से हाे और बच्चा स्वस्थ जन्म ले। गर्भवती महिला का प्रसव अच्छे और सुरक्षित जगह पर हो। हमारे साथ बहुत समस्या हैं, जिसे दूर करना है। हमारे यहां प्रति एक हजार गर्भवती महिलाओं में से 200 की मौत प्रसव के दौरान हो जाती है।