पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • लंबी जिंदगी जीने के लिए वर्चुअल नहीं, रियल वर्ल्ड में जीएं

लंबी जिंदगी जीने के लिए वर्चुअल नहीं, रियल वर्ल्ड में जीएं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हेल्थ रिपोर्टर रांची



लंबी जिंदगी जीने के लिए वुर्चअल वर्ल्ड (स्मार्टफोन और इंटरनेट की दुनिया) मंे ज्यादा वक्त नहीं बिताएं। रियल वर्ल्ड में समय बिताएं। आजकल वर्चुअल वर्ल्ड में जीना अकेलेपन की बड़ी वजह रहा है। जिसके चलते एडल्ट ही नहीं यंगस्टर्स में भी डिप्रेशन आ रहा है। वे लोग एडिक्शन सहित कई अन्य बुरी आदतों को अपना रहे हैं। लंबे समय तक इस दुनिया में रहने के बाद मनोचिकित्सकों से वर्चुअल वर्ल्ड से बाहर आने के लिए थेरेपी ले रहे हैं। मनोचिकित्सकों के मुताबिक, आजकल लोगों में अकेलेपन की समस्या बढ़ रही है। जिसके चलते वे डिप्रेशन के अलावा कई अन्य बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। उनकी जिंदगी कम हो रही है। इसलिए हेल्दी के साथ-साथ लंबी जिंदगी जीने के लिए लोगों को वर्चुअल वर्ल्ड से बाहर निकलना होगा। अकेलापन एडल्ट और बुजुर्गों की प्रॉब्ल्म नहीं रही है। बल्कि युवाओं में यह प्रॉब्ल्म ज्यादा हो रही है। जिसके चलते उनमें डिप्रेशन, एंग्जाइटी सहित कई तरह के मेंटल डिसऑर्डर देखने को मिल रहे हैं।

ओल्ड ऐज में पार्टनर की डेथ होने के कारण अक्सर अकेलापन महसूस होता है। बच्चे उन्हंे पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। इस वजह से उनकी उम्र तो कम होती है। साथ ही वे एंग्जाइटी से ग्रसित रहते हैं।

बचाव : ओल्ड एज होम और क्लब में समय बिताएं।

वर्चुअल से रियल वर्ल्ड में कैसे आएं : पेशेंट्स को कोग्नेटिव थेरेपी देते हैं ताकि सोच में बदलाव लाया जा सके। अकेलेपन के कारण एडिक्शन डवलप होने पर दवाइयाें से ट्रीटमेंट करते हैं।

अकेलेपन से होने वाली बीमारियां

1

हार्ट डिजीज का रिस्क : लगतार अकेले रहने से इंफ्लेमेशन बढ़ता है। यह हार्ट के टिश्यूज और ब्लड वैसल्स को डैमेज करते हुए हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कार्डियोवस्कुलर डिजीज बढ़ाता है।

उम्र घटाता है : प्री-मैच्योर डेथ का एक बड़ा कारण अकेलापन है।

2

3

-डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा, सीिनयर कन्सलटेंट न्यूरो साइकेट्रिक्स, रांची

खबरें और भी हैं...