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बाघा गांव में 5 वर्षों में नहीं बनी सड़क, किसान परेशान

3 वर्ष पहले
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सदर प्रखंड की बाघा पंचायत को मुख्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क लगभग पांच वर्षों से पूरी नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से खखपरता से बाघा गांव सीमांत तक पांच किमी सड़क निर्माण की योजना 2012-13 में आरंभ हुई थी जो आज तक अधूरी पड़ी है।

ग्रामीण हीरानाथ शाह सहित अन्य ने बताया कि सड़क ग्रेड थ्री तक अधूरी बनाकर छोड़े जाने से हर जगह बोल्डर बिखरे हैं। जिसमें ना तो वाहनों का आवागमन आसान है और ना ही पैदल चलना सुलभ। यही वजह है कि इस क्षेत्र से चलने वाले छोटे वाहन जैसे माल वाहक व सवारी ऑटो और पिकअप वैन आदि बंद हो जा रहे हैं। जिसका प्रभाव सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों पर पड़ा है। जो वाहन मुश्किल से आते हैं वे भाड़ा अधिक लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक वर्षों से अखबार बांटने वाले हॉकर तक ने गांव आना छोड़ दिया है।

अखबार पढ़ने का शौक रखने वाले ग्रामीणों को या तो पड़ोस के गांवों में जाना पड़ता है या 7 किमी दूर शहर से अखबार लाना पड़ता है। ज्ञात हो कि 2012-13 में रांची के संवेदक बीनू सिंह ने इस पांच किमी पीएमजीएसवाई सड़क का निर्माण आरंभ किया था। जो ग्रेड टू स्तर तक अधूरा पड़कर बंद है। इस संबंध में सदर प्रखंड प्रमुख पहनू उरांव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में पहले भी आया था। जिसपर पर कार्रवाई को लेकर उच्चाधिकारियों से वार्ता की गई थी। अब भी सड़क की स्थिति में सुधार नहीं आई है तो सड़क का हाल लूंगा और आगामी बोर्ड की बैठक में बात रखूंगा।

पांच किमी सड़क निर्माण की योजना 2012-13 में आरंभ हुई थी जो आज तक अधूरी पड़ी है

बाघा गांव में अधूरी प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना।

पांच गांवों के 7200 लोग प्रभावित

बाघा गांव की मुख्य सड़क की बदहाली से बाघा पंचायत के लगभग 7200 लोग प्रभावित हैं। बाघा पंचायत में बाघा के अलावा ऐने, नदी नगड़ा, बंसरी व सिंगपुर गांव आते हैं। जिनमें रहने वाले लगभग 7 हजार लोगों को पंचायत मुख्यालय आने जाने में परेशानी होती है। पूर्व मुखिया अजय उरांव का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रखंड प्रशासन से शिकायत रखी थी। लेकिन सड़क आज भी बदहाल ही है।

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