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झारखंड के 60 फीसदी व रांची के 78% एटीएम में कैश नहीं

3 वर्ष पहले
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जहां पैसा, वहां लाइन : गढ़वा के एटीएम के बाहर पैसा निकालने के लिए लगी भीड़।

देश के 10 राज्यों से मिल रही है यही शिकायत

भास्कर टीम | रांची/नई दिल्ली

नोटबंदी के 18 महीनों बाद एक बार फिर एटीएम में पर नो कैश के बोर्ड दिख रहे हैं। इस संकट का अंदाजा इसी बात से लगता है कि स्टेट बैंक की रांची शाखा की रोजाना की लिमिट 1600 करोड़ रुपए है। लेकिन मंगलवार को बैंक में मात्र 52 करोड़ रुपए ही थे। झारखंड में विभिन्न बैंकों के कुल 3540 एटीएम हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने 17 जिलों में विभिन्न बैंकों के 451 एटीएम की जांच की। पता चला इनमें से 273 एटीएम ऐसे हैं जिनमें कैश नहीं है। रांची के 50 एटीएम में 39 एटीएम कैशलेस हैं। यानी राज्य में 60% और राजधानी में 78% एटीएम में कैश नहीं है।

झारखंड के अलावा आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से भी यही शिकायत मिल रही है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि पिछले तीन महीने में नकदी की मांग दोगुनी हो गई है। जबकि, अप्रैल के शुरुआती 13 दिन में ही सामान्य की तुलना में पांच गुना ज्यादा करेंसी निकाली गई। अब सरकार 500 के नोटों की छपाई पांच गुना बढ़ाने जा रही है। देश के चार बैंक नोट प्रेस में तीन शिफ्टों में चौबीसों घंटे नोटों की छपाई शुरू कर दी गई है।

भास्कर टीम ने 17 जिलों के 451 एटीएम जांचे, 273 में कैश नहीं

अप्रैल में अब तक निकलने चाहिए थे 8.45 हजार करोड़, निकले 45 हजार करोड़

राज्य में जिलेवार एटीएम में कैश की स्थिति

स्थान एटीएम देखे कैश नहीं

रांची 50 39

जमशेदपुर 50 26

धनबाद 54 48

मेदिनीनगर 20 19

घाटशिला 15 08

सिमडेगा 11 06

कोडरमा 79 12

लातेहार 10 08

चक्रधरपुर 14 10

स्थान एटीएम देखे कैश नहीं

गुमला 23 16

चाईबासा 22 12

बोकारो 42 28

गिरिडीह 12 10

हजारीबाग 11 07

रामगढ़ 12 06

चतरा 12 08

जामताड़ा 14 10

कुल 451 273

आरबीआई-सरकार ने कहा, जल्द खत्म होगी समस्या

राज्यों और आरबीआई में कमेटी बनाकर राज्यों के बीच करेंसी का असंतुलन खत्म किया जाएगा। इसमें दो-तीन दिन लगेंगे। - शिव प्रताप शुक्ला, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री

पर्याप्त कैश है, जल्द दूर होगी समस्या वहीं कैश की किल्लत पर हमने पटना मुख्यालय से जानकारी मांगी है। - संजीव दयाल, प्रभारी महाप्रबंधक रिजर्व बैंक झारखंड

वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

क्या हुआ जनवरी से ही नकदी की मांग दोगुनी हो गई थी

देश में हर माह 19 से 20 हजार करोड़ रु. नकदी की मांग रहती है। पर जनवरी से मांग दोगुनी हो गई। जनवरी से मार्च में हर माह 40 से 45 हजार करोड़ रु. सप्लाई किए गए। इससे स्टॉक कम हुआ। सामान्यत: 3 लाख करोड़ के बदले अभी 1.75 लाख करोड़ का स्टॉक है। अप्रैल में शुरू के 13 दिन में 45 हजार करोड़ रु. की डिमांड रही। यानी रोज 3,461 करोड़ रु. निकले।

वित्तमंत्री, मंत्रालय और आरबीआई ने कहा- जल्द सुधरेंगे हालात...

मंगलवार को सरकार ने पांच स्तरों पर सफाई दी। वित्त मंत्री ने ट्वीट कर कहा कि सरकार के पास पैसे की दिक्कत नहीं है। वित्त राज्य मंत्री और आर्थिक मामलों के सचिव ने मीडिया से बात की। वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक की ओर से बयान जारी किए गए। कहा गया कि राज्यों और आरबीआई में कमेटी बनाकर राज्यों के बीच करेंसी का असंतुलन खत्म किया जाएगा। इसमें दो से तीन दिन लग सकते हैं।

रांची के 50 एटीएम में से 39 एटीएम में पैसे नहीं | पढ़े सिटी फ्रंट पेज

क्याें हुआ 2000 के नोट की छपाई बंद और शादी का सीजन वजह

18 लाख करोड़ की नकदी चलन में है। इनमें 6.7 लाख करोड़ रु. दो हजार के नोटों में हैं। लोगों से ये नोट वापस नहीं आ रहे। इनकी छपाई भी बंद है। 2000 के नोट एटीएम में डालने पर 60 लाख रु. तक आते हैं। पर छोटी करेंसी 15 से 20 लाख रुपए तक के ही आते हैं। सिर्फ 30% एटीएम 200 के नोटों के लिए कैलिब्रेटेड हैं। और इस बीच शादी का सीजन जारी है।

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