पीड़ित को हुई सजा, गुनहगार से पूछताछ तक नहीं
कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता हैं और रहेंगे, अनुशासन का यह मतलब नहीं होता कि जान मारने की धमकी भी सह लें
पॉलिटिकल रिपोर्टर | रांची
कांग्रेस से 6 वर्षों के लिए निष्कासित किए गए प्रदेश कांग्रेस मीडिया शोध समिति के सदस्य सुनील सिंह ने कहा कि पार्टी से वह अपने निष्कासन से काफी दुखी हैं। वह पिछले 28 साल से समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता हैं। उन्हें न तो कांग्रेस से बाहर कोई कर सकता है और न ही वह बाहर हो सकते हैं। वह कांग्रेस में हैं और रहेंगे। उनके मामले में जो भी निर्णय लिया गया है, वह बाहरी दबाव और पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर लिया गया है। इस मामले में पीड़ित को सजा दी गई है और गुनहगार से पूछताछ तक नहीं की गई। सुनील सिंह बुधवार को कांग्रेस भवन में मीडिया से बात कर रहे थे।
सुनील सिंह ने कहा कि अनुशासन का यह मतलब नहीं होता कि जान मारने की धमकी को चुपचाप सह लिया जाए। जान से मारने की धमकी मिलने के बाद उनके पास कानून का सहारा लेने के सिवाय कोई चारा नहीं था। लंबे समय तक पार्टी में रहे हैं। पार्टी द्वारा दी गई सभी जिम्मेदारियों को निभाया, लेकिन सजा के तौर पर उन्हें निष्कासित किया गया, जबकि उनके द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर समिति ने अध्यक्ष से कोई पूछताछ ही नहीं की। इसके पूर्व भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार जमशेदपुर में पार्टी की एक और कार्यकर्ता आनंदमयी पात्रो को जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। वह कार्यकर्ता पिछले 37 सालों से पार्टी से जुड़ा था और 2 साल पहले अध्यक्ष बनने के बाद डॉ. अजय ने उन्हें धमकी दी थी। इस मामले में अनुशासन समिति तक मामला पहुंचा था, लेकिन समिति ने कुछ भी नहीं किया।
उन्होंने कहा कि अनुशासन समिति की बैठक में निर्णय को प्रभावित करने के लिए डॉ. अजय कुमार के नजदीकी को भी शामिल किया गया, जबकि ऐसी बैठकों में समिति से बाहर का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं किया जा सकता। कहा कि उन्होंने अध्यक्ष के खिलाफ जो आरोप लगाए थे, उस पर कोई गौर नहीं किया गया। ऊपर का निष्कासन का आदेश जारी कर दिया गया। कहा कि जब भी किसी पार्टी कार्यकर्ता को डराया जाएगा, तब तक वह विरोध करते रहेंगे और जरूरत पड़ी तो अनशन भी करेंगे।