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कैथलैब फिर खराब, दर्जनों एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी टली, मरीजों ने रिम्स छोड़ा

3 वर्ष पहले
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रिम्स का कार्डियोलॉजी विभाग करीब-करीब ठप हो गया है। यहां के कई महत्वपूर्ण उपकरण खराब हो गए हैं। यहां कैथलैब के अलावा टीएमटी और इको कार्डियोग्राफी मशीनें खराब हो गई हैं। कैथलैब खराब होने से दर्जनों मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी टाल दी गई है। कई ऐसे मरीज विभाग में भरती हैं, जिन्हें तत्काल हार्ट प्रोसिजर करने की आवश्यकता है। लेकिन मशीन खराब होने की वजह से यह काम नहीं हो रहा है। टीएमटी मशीन भी नौ दिनों से खराब है। यहां लगाई गई दो ईको-कार्डियोग्राफी मशीन में से एक खराब है। मशीनों के खराब होने से कामकाज करीब-करीब ठप है। विभाग में भर्ती मरीज अब इन मशीनों के ठीक होने के इंतजार में हैं। इधर, प्रबंधन का कहना है कि उन्हें मशीनों के खराब होने की आधिकारिक सूचना नहीं है।

कैथलैब मशीन शनिवार से ही खराब है। ठीक करने के लिए रिम्स पहुंचे सीएमसी कंपनी के अधिकारी का कहना है कि अभी एक सप्ताह और लगेगा। अभी तक उन्हें सीएमसी के पैसे का भुगतान नहीं किया गया है। जबकि रिम्स प्रबंधन को दिसंबर में ही पैसे का भुगतान कर देना था।

मंत्री ने दिया है नया कैथलैब लगाने का आदेश

स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने रिम्स निदेशक डॉ. अारके श्रीवास्तव को छह माह के भीतर कार्डियोलॉजी विभाग में नया कैथलैब लगाने का निर्देश दिया है। मंत्री ने रिम्स निदेशक को निर्देश दिया है कि कार्डियोलॉजी में जो वर्तमान कैथलैब है, उसकी आयु खत्म होने को है। उसका एनुअल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट (एएमसी) भी खत्म होने वाला है। ऐसे में एएमसी खत्म होने से पहले ही नए कैथलैब की खरीद कर ली जाए। हालांकि मंत्री के आदेश के बाद भी अभी तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

16 मार्च को भी खराब हो गया था कैथलैब

रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग का कैथलैब 16 मार्च को भी खराब हो गया था। कैथलैब करीब 10 दिनों तक खराब रहा। इस कारण दर्जनों मरीजों का उपचार नहीं हो सका। एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्टी के लिए विभाग पहुंचे दर्जनों मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ा। एक सप्ताह पहले ही मशीन ठीक कराई गई थी।

प्रबंधन ने सीएमसी करने वाली कंपनी को भी नहीं दिए हैं पैसे

टीएमटी मशीन भी नौ दिनों से खराब

...तो बंद हो जाएगा कार्डियोलॉजी यूनिट

कार्डियोलॉजी विभाग के कैथलैब की उम्र समाप्त हो चुकी है। अगस्त के बाद संबंधित कंपनी 10 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कैथलैब का सीएमसी (विस्तृत रखरखाव अनुबंध) नहीं करेगी। कैथलैब यदि बंद हो गया तो न ही एंजियोग्राफी होगी, न एंजियोप्लास्टी, न तो पेस मेकर लगेंगे, न ही होगी बैलूनिंग। यानी, कैथलैब के अभाव में कार्डियोलॉजी के साथ-साथ कार्डियक सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग भी ठप हो जाएगा।

टीएमटी मशीन भी नौ दिनों से खराब, मरीजों कर रहे हैं इंतजार

मनपसंद कंपनी से खरीद के कारण फंसा मामला : रिम्स में कैथलैब खरीदने की प्रक्रिया लगभग तीन वर्ष पहले शुरू की गई थी। तत्कालीन कार्डियोलॉजिस्टों ने राष्ट्रीय मानक के अनुरूप कैथलैब का स्पेसिफिकेशन प्रबंधन को जमा कर दिया था। लेकिन वह स्पेसिफिकेशन किसी एक कंपनी की बजाए कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर लागू हो रही थी, जो क्रय समिति को पसंद नहीं था। हालांकि, क्रय समिति के द्वारा कैथलैब का स्पेसिफिकेशन पूर्व निर्धारित एक कंपनी के अनुरूप बनाने की पूरी कोशिश की गई। लेकिन, सफलता नहीं मिलने पर प्रक्रिया ही ठंडे बस्ते में चली गई।

यह हो रहा नुकसान

कैथलैब :
मरीजों की एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर लगाने का कार्य नहीं हो रहा।

टीएमटी मशीन : ट्रेड मिल टेस्ट एक तरह का कॉर्डियोलॉजिस्ट टेस्ट है। मशीन एक तरह की मूविंग बेल्ट है, जिस पर चलते समय सांस फूलने, हार्ट ब्लॉकेज जैसी बीमारी का ईसीजी के जरिए पता लगाया जाता है।

इको कार्डियोग्राफी- हृदय की धमनियों के कार्य करने का इमेज स्क्रीन पर देखा जाता है। अभी एक मशीन खराब होने के कारण दूसरी मशीन पर वर्क लोड बढ़ गया है।

दो दूधमुंहे बच्चों की पांच दिन से जांच नहीं

हेल्थ रिपोर्टर | रांची

पलामू के लोइंगा गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में टीकाकरण के बाद 4 बच्चों की मौत स्वास्थ विभाग के लिए रहस्य बनी हुई हैं। वहीं गंभीर स्थिति में रिम्स रेफर किए गए दो बच्चों के इलाज में अस्पताल प्रबंधन लापरवाही बरत रहा है। इनमें 18 माह का प्रभात कुमार और चार माह की मुन्नी कुमारी शामिल हैं। प्रभात अमर वर्मा के वार्ड में और मुन्नी एके चौधरी की यूनिट में भर्ती हैं। इनके माता-पिता व अभिभावकों को जांच के लिए पूरे रिम्स का चक्कर लगवाया जा रहा है। इन इलाजरत बच्चों को दवाएं मुफ्त में देने का आदेश है, लेकिन परिजनों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

मुन्नी के परिजनों ने बताया कि पहले कुछ दवाएं अस्पताल से मिले। लेकिन लगभग 500 रुपए की स्लाइन और कुछ दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ी हैं। इस संबंध में पूछने पर नर्स ने बताया कि ये स्लाइन वार्ड में नहीं है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि टीकाकरण मामले के 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के किसी भी अधिकारी ने हमारी सुध नहीं ली है। हमारे बच्चों का सही ढंग से इलाज हो रहा है या नहीं, कोई पूछने वाला तक नहीं है।

पैसा लिया गया है तो कार्रवाई

टीकाकरण से बीमार बच्चों का इलाज मुफ्त में करना है। इसके बाद भी अगर पैसा लिया गया है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आरके श्रीवास्तव, डायरेक्टर, रिम्स

टीकाकरण से बीमार इन बच्चों को मुफ्त में नहीं मिल रहीं दवाएं

भटकने के बाद थक कर बैठी प्रभात की मां।

पांच दिन से पूरा अस्पताल घूम रहे, कोई सुन नहीं रहा : मुनवीर

प्रभात के पिता मुनवीर पासवान ने बताया कि 13 अप्रैल को डाॅ. अमर ने ईसीजी, इको और चेस्ट एक्स-रे कराने को कहा था। लेकिन हम दौड़ते ही रह गए। कोई सुन नहीं रहा है। जूनियर डॉक्टर से पूछते तो वे गार्ड के पास भेजते। गार्ड के पास जाते तो वह नर्स के पास भेज देता। 18 अप्रैल को डॉ. अमर ने फिर से ईसीजी के लिए लिखा। अधीक्षक ऑफिस में पर्ची पर मुहर लगवाने गए तो डायरेक्टर से साइन कराने को कहा गया।

परिजन सहयोग नहीं कर रहे

ईसीजी हो चुकी है। अगली जांच अगले विजिट में कराएंगे। अभी पेशेंट ठीक है। जरूरी साइन नहीं होने से जांच नहीं हो पाई। परिजन सहयोग नहीं करते हैं। डाॅ. अमर वर्मा, शिशु वार्ड

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