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एफिलिएटेड हाईस्कूलों के अनुदान के 88 करोड़ कैसे लैप्स हुए, बताएं : सीएमओ

3 वर्ष पहले
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चीफ मिनिस्टर ऑफिस (सीएमओ) ने स्कूली शिक्षा सह साक्षरता विभाग से पूछा है कि राज्य के एफिलिएटेड (स्थापना अनुमति प्राप्त) हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों के अनुदान मद में आवंटित 88 करोड़ रुपए कैसे लैप्स हो गए। इसे लेकर मुख्यमंत्री के सचिव सुनील कुमार वर्णवाल ने विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह को पत्र भेजकर जवाब मांगा है।

पत्र के साथ तीन सांसदों और 13 विधायकों की वे चिट्ठियां भी संलग्न की गई है, जो मुख्यमंत्री को लिखकर इस ओर ध्यान देने का आग्रह किया गया है। साथ ही इन विद्यालयों का अधिग्रहण करने या घाटा अनुदान का दर्जा देने की मांग की गई है। इसमें बताया गया है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च को दिखावे के लिए आवंटित 88 करोड़ में से 43 करोड़ रुपए ट्रेजरी भेजे गए थे, जो पास नहीं हो सके। झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त मोर्चा ने इसके लिए विभागीय अधिकारी को जिम्मेवार ठहराया है।



रेग्यूलेशन के अनुसार मिले अनुदान राशि

मोर्चा ने आरोप लगाया है कि वित्तरहित शिक्षण संस्थानों को अनुदान देने में रेग्यूलेशन की अनदेखी की गई है। रेग्यूलेशन के अनुसार जहां 40 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास होंगे, वहां 100 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान है। अब नियम में संशोधन किए बगैर विभाग कह रहा है कि स्टूडेंट्स का जितना पास प्रतिशत होगा, उतनी फीसदी राशि ही अनुदान मद में दी जाएगी। शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं।

सांसद-विधायकों ने लिखी चिट्ठी

सांसद : पशुपति नाथ सिंह, रामटहल चौधरी और रवींद्र राय।

विधायक : योगेश्वर प्रसाद बाटुल, शिवशंकर उरांव, जगरनाथ महतो, केदार हाजरा, नागेंद्र महतो, जयप्रकाश भाई पटेल, मेनका सरदार, अशोक कुमार, ताला मरांडी, नलिन सोरेन, बिरंची नारायण, इरफान अंसारी और रवींद्र नाथ महतो।

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