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पांच छात्रों ने परीक्षा के बाद मूल्यांकित कॉपियों में दोबारा लिखे आंसर

3 वर्ष पहले
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रांची यूनिवर्सिटी में एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नया मामला स्नातक पार्ट-टू की उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित है, जिसमें परीक्षा के बाद मूल्यांकित कॉपियों में दोबारा आंसर लिखे गए हैं। अब तक पांच छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की बात सामने आई है।

इस घटना ने आरयू प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि मूल्यांकन के बाद कॉपियों को स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाता है। कॉपियां स्ट्रांग रूम से बाहर तभी आती हैं, जब इसके लिए विवि प्रशासन विशेष आदेश देता है। ऐसे में जांच के बाद उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ कैसे हुई, यह बड़ा सवाल है। कहा जा रहा है कि ऐसा मामला विवि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है। बताते चलें कि फर्जीवाड़ा करनेवाले सभी स्टूडेंट्स स्नातक पार्ट-टू साइंस के हैं। इधर, परीक्षा नियंत्रक डॉ. आशीष कुमार ने कहा है कि इस मामले की सूक्ष्मता से जांच हो, ताकि इसमें शामिल लोग बेनकाब हो सकें।

ऐसे हुआ खुलासा

स्नातक का रिजल्ट नवंबर 2017 में घोषित किया गया था। इसमें कम अंक आने या संबंधित विषय में फेल होने के बाद स्टूडेंट्स ने आरटीआई के तहत कॉपियों के अवलोकन के लिए आवेदन दिया था। आरयू प्रशासन के निर्देश पर संबंधित कॉपियों को विवि मुख्यालय में भेज दिया। इसके बाद इन पांचों छात्रों ने कॉपियां देखने के बाद ग्रिवांस सेल में आवेदन देकर कहा कि कई प्रश्नों का जवाब देने के बाद अंक नहीं दिए गए हैं। इस आवेदन के बाद ग्रिवांस सेल की बैठक हुई। जिसमें कॉपियों की जांच के बाद पता चला कि इसमें छेड़छाड़ की गई है।

रांची विवि में स्नातक पार्ट-टू का रिजल्ट नवंबर 2017 में ही घोषित किया गया था

अवकाश बाद आरोपियों पर दर्ज होगी प्राथमिकी
उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ किया गया है। ग्रिवांस सेल के सदस्यों ने इसकी पुष्टि कर दी है। मामले से अवगत होने के बाद वीसी ने प्राथमिकी की स्वीकृति दे दी है। आरोपियों पर अवकाश बाद प्राथमिकी होगी। -डॉ. दिवाकर मिंज, प्रॉक्टर, आरयू

राकेश | रांची

रांची यूनिवर्सिटी में एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नया मामला स्नातक पार्ट-टू की उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित है, जिसमें परीक्षा के बाद मूल्यांकित कॉपियों में दोबारा आंसर लिखे गए हैं। अब तक पांच छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की बात सामने आई है।

इस घटना ने आरयू प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि मूल्यांकन के बाद कॉपियों को स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाता है। कॉपियां स्ट्रांग रूम से बाहर तभी आती हैं, जब इसके लिए विवि प्रशासन विशेष आदेश देता है। ऐसे में जांच के बाद उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ कैसे हुई, यह बड़ा सवाल है। कहा जा रहा है कि ऐसा मामला विवि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है। बताते चलें कि फर्जीवाड़ा करनेवाले सभी स्टूडेंट्स स्नातक पार्ट-टू साइंस के हैं। इधर, परीक्षा नियंत्रक डॉ. आशीष कुमार ने कहा है कि इस मामले की सूक्ष्मता से जांच हो, ताकि इसमें शामिल लोग बेनकाब हो सकें।

ऐसे हुआ खुलासा

स्नातक का रिजल्ट नवंबर 2017 में घोषित किया गया था। इसमें कम अंक आने या संबंधित विषय में फेल होने के बाद स्टूडेंट्स ने आरटीआई के तहत कॉपियों के अवलोकन के लिए आवेदन दिया था। आरयू प्रशासन के निर्देश पर संबंधित कॉपियों को विवि मुख्यालय में भेज दिया। इसके बाद इन पांचों छात्रों ने कॉपियां देखने के बाद ग्रिवांस सेल में आवेदन देकर कहा कि कई प्रश्नों का जवाब देने के बाद अंक नहीं दिए गए हैं। इस आवेदन के बाद ग्रिवांस सेल की बैठक हुई। जिसमें कॉपियों की जांच के बाद पता चला कि इसमें छेड़छाड़ की गई है।

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