चारा घोटाले में पहली बार 14 साल की कैद के साथ दो करोड़ रुपए का जुर्माना
दुमका कोषागार से 34.91 करोड़ रुपए की अवैध निकासी से संबंधित चारा घाेटाला कांड संख्या आरसी 45ए/96 में बुधवार को 37 दोषियों को सजा सुनाई गई। इनमें पशुपालन विभाग के 16 अधिकारी और डॉक्टर शामिल शामिल हैं। इन्हें साढ़े तीन साल से 14 साल तक की सजा दी गई। एक से दो करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह की कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सजा सुनाई। कोर्ट सभी दोषियों और ट्रायल के दौरान मृत अभियुक्तों की एक जनवरी 1990 के बाद की संपत्ति की ईडी से जांच कराने और अवैध मिलने पर जब्त कराने का आदेश दिया। सबसे ज्यादा 14 साल की सजा दुमका के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक ओमप्रकाश दिवाकर को दी गई। उन पर दो करोड़ का जुर्माना लगाया गया। इन्हें मिली सजा : पेज 5 पर
34.91 करोड़ के घोटाले में 29 करोड़ का जुर्माना
22 जनवरी 1996 को दुमका में दर्ज हुई थी एफआईआर
यह मामला वर्ष 1991-92 और 1995-96 के बीच 34 करोड़ 91 लाख 54 हजार 844 रुपए की अवैध निकासी से संबंधित है। इस मामले में सबसे पहले 22 जनवरी 1996 को दुमका टाउन थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। 15 अप्रैल 1996 को सीबीआई ने कांड संख्या आरसी 45ए/96 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की। 12 अक्टूबर 2001 को अदालत में चार्जशीट दायर हुई और 24 जुलाई 2004 को 60 अभियुक्तों के खिलाफ अदालत में चार्ज फ्रेम हुआ था। इस मामले में कुल 29 करोड़ जुर्माना लगाया गया है।
14 अभियुक्तों का ट्रायल के दौरान निधन, एक अब भी फरार
ट्रायल के दौरान 14 अभियुक्तों का निधन हो गया। ये हैं- डॉ. शेषमुनी राम, डॉ. बजरंग देव नारायण सिन्हा, डॉ. सत्यनारायण सिंह, डॉ. इंद्रासन सिंह, डॉ. मोहम्मद वसीमुद्दीन, डॉ. विनय कुमार, बालमुकुंद झा, कालिका प्रसाद सिन्हा, ओम प्रकाश शर्मा, चंद्रशेखर दुबे, ओम प्रकाश गुप्ता, महेंद्र प्रसाद, अजय कुमार सिन्हा और डॉ. अजित कुमार सिन्हा। सुशील कुमार झा और प्रमोद कुमार जायसवाल ने अपराध स्वीकार कर लिया था। वहीं डॉ. मोहम्मद सईद, रामेश्वर चौधरी, शिवकुमार पटवारी, नरेश प्रसाद और शैलेश प्रसाद सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। एक अभियुक्त फूल सिंह अब तक फरार है।