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खाली दो डिब्बे हटाने में 14 घंटे लगे और 30 किमी स्पीड की ट्रेन कैसे पलटी, जांच में होगा खुलासा

3 वर्ष पहले
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हटिया-राउरकेला सेक्शन के परबाटोनिया स्टेशन के समीप खाली मालगाड़ी के दो डिब्बे पलटने के मामले में डीआरएम विजय कुमार गुप्ता ने जांच टीम गठित कर दी है। यह टीम सोमवार को परबाटोनिया स्थित घटनास्थल की जांच करेगी। इस मामले की रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर डीआरएम को सौंपी जाएगी। जांच का मुख्य बिंदु होगा-दुर्घटना कैसे हुई। साथ ही यह भी जांच जाएगी कि मेन लाइन क्लियर करने में 14 घंटे का समय क्यों लगा। उस सेक्शन में मालगाड़ी की स्पीड 30 किमी प्रतिघंटे की थी, तो इतनी जबरदस्त दुर्घटना कैसे हुई, जिसमें मालगाड़ी के डिब्बे के चक्के निकले गए और लाइन में धंस गए। साथ ही मेकेनिकल आैर इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही की वजह से तो दुर्घटना नहीं हुई है। मेकेनिकल विभाग की लापरवाही और मिस मैनेजमेंट की वजह से 14 घंटे दो खाली बोगी को हटाने में लग गए, जबकि इस कार्य के लिए सात से आठ घंटे का समय काफी था। मेकेनिकल विभाग ने बोगी को हटाने के लिए बंडामुंडा से 140 टन का क्रेन मंगवाया और उस क्रेन को आने में करीब तीन घंटे लगे। क्रेन को फंक्शन में लाने में एक घंटे का और वक्त लगा। इसी दौरान घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने इलेक्ट्रिकल ओवर हेड तार को तोड़वा दिया। इसी बीच हटिया पहुंची एक्सीडेंटल रिलीफ ट्रेन के उपकरण से ही मालगाड़ी के दो डिब्बे को उठा लिया गया और क्रेन की जरूरत नहीं पड़ी।

गिट्टी की वजह से बोगी हुआ था अनबैलेंस, दो बोगी पलट गई : बताया गया कि मालगाड़ी गिट्टी गिरा कर लौट रही थी। बोगी में एक तरफ गिट्टी रहने से बोगी अनबैलेंस हो गया और मालगाड़ी की दो बोगी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। घटनास्थल पर डिरेल हुई मालगाड़ी के डिब्बे गिट्टी में पाई गई है। रेलवे अधिकारी घटना का कारण इसी वजह को बता रहे हैं। अब जांच पर पूर मामला अटक गया।

मालगाड़ी दुर्घटना मामले में जांच टीम गठित, घटना स्थल पर नहीं गए थे सेफ्टी ऑफिसर

रिम्स में मधुमक्खियों के कई छत्ते, डर से खिड़की नहीं खोलते हैं वार्ड में भर्ती मरीज
ज्यादातर छत्ते वार्ड की खिड़कियों के पास, कॉरिडोर के मरीजों पर अधिक खतरा
हेल्थ रिपोर्टर | रांची

रिम्स के मरीज और उनके परिजन मधुमक्खी के छत्ते से परेशान हैं। मरीजों को अपनी बीमारी के साथ-साथ इन पर भी ध्यान रखना पड़ रहा है। क्योंकि, सभी छत्ते खिड़की के पास ही हैं। वार्ड के मरीज डर से खिड़की नहीं खोल पाते। वहीं, कॉरिडोर में इलाजरत मरीजों और उनके परिजनों पर मधुमक्खियां का खतरा हमेशा बना रहता है। मरीजों का कहना है कि कई बार कुछ मधुमक्खी आसपास आ कर उड़ते हैं। दोपहर के समय में ये ज्यादा आते हैं। ऐसे में मरीजों में भय बना रहता है। इन सबके बावजूद इन छत्तों को नहीं हटाया गया। मरीजों ने बताया कि इसकी शिकायत रिम्स प्रबंधन से की गई है। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

हो सकती है बड़ी अनहोनी
न्यूरो सर्जरी वार्ड के बाहर कॉरिडोर में हमेशा मरीजों का इलाज होता है। मरीज के साथ-साथ उनके परिजन भी रहते हैं। इस वार्ड में भी कई छत्ते हैं, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। कई बार मधुमक्खियों का झुंड पीने के पानी के पास भी मंडराते हैं। किसी दिन इनका हमला हुआ तो बड़ी अनहोनी हो सकती है।

मैकेनिकल, इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही तो नहीं
रेलवे के नियमानुसार घटनास्थल पर डिवीजनल सेफ्टी ऑफिसर को जाना जरूरी है। क्योंकि उन्हें सेफ्टी जुड़े सभी पहलुओं को देखना और रिपोर्ट देना होता है, लेकिन मालगाड़ी दुर्घटना मामले में सेफ्टी आॅफिसर बीके सिन्हा घटना स्थल पर नहीं गए। सेफ्टी विभाग के अधिकारी के नहीं पहुंचने से जांच में असर पड़ेगा। क्योंकि घटना के कारण और सेफ्टी का उल्लंघन की जांच करने की जिम्मेवारी बीके सिन्हा की थी। उनकी रिपोर्ट पर पता चलता कि घटना की असली वजह क्या है। इसी सेक्शन के टाटी हादसे में भी सेफ्टी ऑफिसर की लापरवाही सामने आई। यूटीवी मशीन की सेफ्टी देखना इनका काम था, लेकिन इन्होंने नहीं देखा और इसी वजह से दो पायलटों की जान चली गई।

जर्जर छज्जों पर भी हैं छत्ते
मधुमक्खियों के छत्ते कई वार्ड की खिड़की से सटे हुए हैं। इसके कारण मरीज खिड़की भी नहीं खोलते हैं। खिड़की खोलने से कई बार मधुमक्खियां अंदर आ जातीं हैं। मधुमक्खियों के छत्ते खिड़की से बिलकुल सटे हुए हैं। बहुत दिनों से मरम्मत नहीं होने से खिड़की के छज्जे भी जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में मधुमक्खी लगे छज्जे गिरे तो बड़ी घटना घट सकती है।

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