स्वर्ग से सुंदर अपन मिथिला धाम, दिल में बसलौ, अहां धड़कन में बसा लिअ...
हरमू मैदान में तीन दिवसीय मिथिला महोत्सव के अंतिम दिन छऊ नृत्य के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम की शरुआत की गई। इससे पूर्व भगवती गीत जय-जय भैरवि गोसाउिन प्रस्तुत किया गया। मौके पर भारत सरकार के सचिव वित्त व्यय एएन झा, भारतीय वित्त सेवा के अधिकारी अजयानंद झा पंकज, भारतीय रेल ट्रैफिक सेवा के अधिकारी नीरज कुमार, बीएसएनएल के सीजीएम केके ठाकुर सहित कई विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया गया। प्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर ने मैथिली की परंपरागत गीतों से दर्शकों का मन माेहा।
मैथिली ने अपन किशोरी जी के टहल बजेबे हे, हम मिथिला में रहबे... माई हे जोगिया ठाढ़ अंगनमा में..., राम लक्ष्मण चलल बिभाह और उगना रे मोर कतए गेलाह के साथ समा बांधा। गायक माधव ने जुल्फी वाली कनिया... ई जुनि पुछू आंहा बिना... रंगीला ई बिहार में गैले गीत मिथिलावासी झूम उठे। देर रात तक माधव के मनमोहक गीतों से मिथिलावासी हरमू मैदान में झूमते रहे।
स्वर्ग से सुंदर अपन मिथिला धाम, दिल में बसलौ, अहां धड़कन में बसा लिअ... सुन पगली गे, पागल कहैयेे जमान..., खिड़की के दोग स तु पर्दा हटादे के अलावे गायिका जुली झा जग में गत पहिने उगए सुरुज हे, कोने रे मासे बैसवा हरियासे गेलय, डिबिया जरा कनभ छी सजना के याद मे... छौड़ा कटाए अहुरिया अन्हार में जैसे गीतों से पूनम मिश्रा ने भी समा बांधा। गीत-संगीत का कार्यक्रम सुबह से शाम तक चला। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीपाल झा, महासचिव संतोष झा, संयोजक मनोज मिश्रा, सहित 400 से अधिक मंच के स्वयंसेवक तथा वैदिही प्रकोष्ठ की 100 से अधिक महिला स्वयं सेवकों ने सहयोग किया।
मिथिला के मंच पर झारखंड की संस्कृति का मिश्रण
मिथिला के मंच पर झारखंड की संस्कृति दिखाई गई। झारखंड के प्रसिद्ध छऊ नृत्य का दर्शकों ने आनंद लिया। छऊ नृत्य सामरिक भंगिमाओं और नृत्य का मिश्रण है। इसमें लड़ाई की तकनीक एवं पशु की गति और चाल को दर्शाया जाता है। इसमें ग्रामीण गृहिणी के काम-काज पर भी नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। इसे पुरुष नर्तक स्त्री का वेश धारण कर करते हैं। नृत्य में कभी कभी रामायण और महाभारत की घटना का भी चित्रण होता है। यह नृत्य ज्यादातर रात को खुले में किया जाता है, जिसे अखड़ या असार भी कहा जाता है। यह नृत्य परंपरागत लोक संगीत की धुन के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
माछ-भात, मखान व पान का आनंद
हरमू मैदान में 20 हजार लोगों के लिए माछ-भात की व्यवस्था की गई। इसके अलावे मिथिला की प्रसिद्ध 56 तरह के भोजन की भी व्यवस्था की गई। मिथिला मखान के अलावे पान की भी पर्याप्त अरेजमेंट किया गया था। करीब 10 क्विटंल मछली की व्यवस्था झारखंड मिथिला मंच की ओर से किया गया। इसके अलावे विभिन्न प्रकार के स्टॉल सजाए गए थे। जिनमें पेंटिंग्स युक्त परिधान सहित मिथिला की पुस्तक व सीडी भी मौजूद थी।