रिम्स के पीजी छात्र-छात्राओं ने नई बांड पॉलिसी को पुराने बैच से लागू करने के सरकार के निर्णय के विरोध में शनिवार को संस्थान में तालाबंदी की। छात्रों ने एकाउंट सेक्शन, स्टूडेंट सेक्शन समेत अधिकारियों के कार्यालयों को बंद करा दिया। इससे पहले हाफ तक प्रशासनिक कामकाज ठप रहा। रिम्स निदेशक का कार्यालय भी बंद कराया। छात्रों ने सरकार और रिम्स प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और धरने पर बैठे। करीब तीन घंटे तक हो-हंगामे के बाद रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ. आरके श्रीवास्तव के लिखित आदेश के बाद छात्र माने और अपना आंदोलन स्थगित कर दिया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेडीए अध्यक्ष डॉ. अजीत ने कहा कि वे सभी पिछले 21 दिनों से अपनी मांगों को लेकर सबसे मिल रहे हैं, पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यही रवैया रहा तो वे लोग सोमवार से फिर काम बंद कराएंगे। पुराने छात्रों पर नया बांड लागू करना तुगलकी फरमान है। छात्रों के आंदोलन के समय प्रधान सचिव, स्वास्थ्य निधि खरे योग पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची थीं। छात्र उन्हें वार्ता के लिए बुलाने की मांग कर रहे थे। हालांकि निधि खरे ने रिम्स निदेशक को आवश्यक निर्देश दिया और इस संबंंध में आदेश निकालने को कहा।
प्रभारी निदेशक के लिखित आदेश के बाद आंदोलन टला
पीजी स्टूडेंट को समझाते रिम्स के प्रभारी निदेशक।
नई पॉलिसी को नए सत्र से लागू करने की मांग
रिम्स के पीजी स्टूडेंट का कहना है कि 24 अप्रैल 2018 को झारखंड कैबिनेट से पारित नए आदेश के तहत अब उन्हें एडमिशन के समय तीन साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करने का बांड भरना है। अगर वे इसका उल्लंघन करते हैं तो उन्हें 30 लाख रुपए जुर्माना और लिए गए वेतन-भत्ता लौटाना होगा। लेकिन यह बांड पिछले सत्र (बैच 2016-17, 2017-18) के छात्र-छात्राओं पर लागू किया जा रहा है, जो सही नहीं है। कारण है कि वे पहले एक साल का बांड भर चुके हैं। फिर से उन्हें नया बांड भरने का दबाव बनाया जा रहा है।
यह नियम 2018 बैच के स्टूडेंट पर लागू होगा
पीजी छात्रों के आंदोलन के बाद रिम्स निदेशक की ओर से शनिवार की दोपहर एक आदेश निकाला गया है। इसमें कहा गया कि पीजी के स्टूडेंट की मांगों के संबंध में मुख्य सचिव और प्रधान सचिव स्वास्थ्य की अोर से निर्देश जारी किए गए हैं। इसके आलोक में यह प्रावधान केवल सत्र 2018 बैच के पीजी छात्रों पर लागू होगा।