बिहार से अलग राज्य बनने के बाद झारखंड के हिस्से में 185 मदरसा व 12 संस्कृत हाईस्कूल मिले थे। इन शिक्षण संस्थानों में सेवा दे रहे शिक्षकों को सरकारी स्कूलों की तरह वेतन मिलता था। लेकिन, मदरसा और संस्कृत हाईस्कूल के शिक्षक पेंशन के लाभ से वंचित थे। वर्ष 2015 में इन संस्थानों में सेवा दे रहे शिक्षकों को तत्कालीन हेमंत सरकार ने पेंशन देने का फैसला लिया था। कैबिनेट द्वारा प्रस्ताव को स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई थी। इसके बाद शिक्षकों को पेंशन देने की प्रक्रिया शुरू की गई। तब तक सरकार बदल गई। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, पेंशन देने की संचित बढ़ी, जिस पर वित्त व कार्मिक विभाग द्वारा आपत्ति जता दी गई है। पिछली सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को रद्द करने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संलेख तैयार कर लिया गया है, जिसे कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा।
रिटायरमेंट आयु 62 से 60 वर्ष किया गया
वर्ष 2015 में जब मदरसा और संस्कृत हाईस्कूल के शिक्षकों को पेंशन का लाभ देने के लिए फाइल बढ़ी थी, तब इन शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 62 वर्ष थी। अधिकारियों का कहना था कि सरकार उन्हीं कर्मियों पेंशन देती है, जिनकी रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष है। इसके बाद सेवा दे रहे शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष की गई। इसके बाद मदरसा और संस्कृत हाईस्कूल शिक्षक 60 वर्ष में रिटायर्ड करने लगे।
हाईकोर्ट में लगाई याचिका
सरकार द्वारा रिटायरमेंट आयु 60 कर दी गई। इससे मदरसा और संस्कृत हाईस्कूल के 60 वर्ष से अधिक जिन शिक्षकों की आयु थी, वे रिटायर्ड कर गए। इसके बाद इन शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई। इनका शिक्षकों कहना था कि 60 वर्ष से अधिक आयु में रिटायर्ड शिक्षकों को भी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। यह मामला अभी उच्च न्यायालय में चल रहा है।
रिपोर्ट भी पेंशन देने के पक्ष में नहीं
मदरसा और संस्कृत हाईस्कूलों में शिक्षकों के पेंशन मामले को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट संस्कृत व मदरसा शिक्षकों को पेंशन देने के पक्ष में नहीं है। कमेटी ने 11 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्त न तो सरकार द्वार की गई है और न ही इन स्कूलों का अधिग्रहण किया गया है। प्रमोशन, रिटायरमेंट आयु भी अलग है।